
I have been living alone with my Dauaghter for 15 yours to keep her away from conservative social mindsets and to provide quality education. I used to doubt my decision that at times but listening to Acharya ji cleared all my confusion and confirmed that I was right all along. I give my Dauaghter 20 books 📚 for her 20th Birthday. Thank you so much Acharya ji...🙏

जहां अज्ञानता और अपूर्णता होती है डर सिर्फ वही आता है। जब आप खुद को समझने लगेंगे सत्य को समझने लगेंगे डर अपने आप खत्म होते जाएगा तो सवाल यहां पर यह नहीं है की हमें डर लगता है सवाल यहां पर यह है कि हमें डर क्यों लगता है इसका जवाब साफ है हमारे अंदर अज्ञानता है समझ के साथ ही डर खत्म हो जाता है।

डर (Dar) पढ़ते समय मुझे सबसे पहले यह महसूस हुआ कि हम आमतौर पर डर को बहुत सतही तरीके से समझते हैं—जैसे बस एक भावना जिसे हटाना है। लेकिन यह किताब उस सोच को पूरी तरह बदल देती है। किताब में बार-बार यह बात सामने आती है कि डर बाहर की चीज़ों से कम और हमारे अंदर की असुरक्षा, अधूरेपन और “मैं” की पकड़ से ज्यादा जुड़ा हुआ है। यह बात मुझे काफी relatable लगी, क्योंकि हम अक्सर परिस्थितियों को दोष देते हैं, खुद ...
पहले मुझे बहुत डर लगता था कई बातों से, अब मुझे डर बुक को पूरा पढ़ने के बाद स्पष्ट हुआ कि जीवन में डर की वजह क्या है। डर बुक को पढ़ने से मुझे बहुत क्लैरिटी मिला है और जीवन में अब मैं डर को समझने लगी हूं कि मैं क्यों डरती थी और अब बुक को पूरा पढ़ने के बाद डर मेरे लिए कहां usefull है और किस बात से मुझे नहीं डरना चाहिए स्पष्ट हो गया है।

इस पुस्तक में आचार्य जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से डर को समझाया है| तथा उसकी निवारण के तरीके भी सुझाए हैं| डर किस प्रकार अज्ञानता वश हमारे अंदर आ जाता है तथा हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करता है| डर हमारी प्रतिभा को कैसे संकुचित करता है तथा उसके द्वारा हमारे जीवन की कितनी हानि होती है| यह सभी इस पुस्तक में अच्छे से समझाया गया है| जो भी डर से जूझ रहा हो उसको यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए कि डर का सामना ...

दो तरीक़े हैं दुनिया को जानने के ताकि डर से मुक्ति मिल सके – या तो वो सब वस्तुएँ जान लो जो दिखाई पड़ती हैं बाहर, या उसको जान लो जो उन वस्तुओं को देखता है। जिन भी लोगों को संसार से आसक्ति होती हो या संसार से भय लगता हो, उनकी आसक्ति और भय दोनों को ही मिटाने के मात्र दो ही तरीक़े हैं – या तो दुनिया को जान लो क्योंकि दुनिया ही तुम्हें हैरान-परेशान कर रही है। कभी खींचती है, कभी रुलाती है। या उसको जान ल...

ये किताब पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि हमारे जीवन के कितने सारे निर्णय डर की वजह से लिए जाते हैं । Career से लेकर life partner चुनने तक। हम अपना पूरा जीवन डर - डर के ही जीते हैं। अगर हम इस डर से पार पा ले तो जीवन बहुत बेहतर हो सकता है। इस किताब में आचार्य जी डर को समझाते हुए उसकी तह तक जाते हैं और हर तरह के डर पर बात करते हैं। इस किताब को पढ़ने से पहले मेरे जीवन में बहुत डर थे जैसे मौत का डर, अक...

जब मैं आचार्य की किताबें पढ़ना शुरू की थी तो यह मेरी दूसरी किताब थी जिसको मैंने पढ़ना शुरू किया था, क्योंकि जिंदगी में इतना डर था कि उसका कोई उपाय मुझे नजर नहीं आ रहा था हर चीज में डर, हर छोटी चीज से लेकर हर बड़ी चीज में डर रहता था। जब मैंने जब इसे पढ़ना शुरू किया तब मुझे समझ में आने लगा कि हमारा सारा डर इसी बात का है कि हम खौफनाक दुनिया में आ गए हैं और इस जगह लूटने का खतरा है हमारा डर यही रहता है...

डर मेरी पसंदीदा पुस्तकों में से एक है। मुझे डर बहुत ही अधिक था। हर एक बात पर दूसरों का मुंह देखा करते थे। कुछ भी नया करने से पहले एक डर बना रहता था कि पता नहीं क्या होगा। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद मुझे समझ में आ गया कि जीवन डरने के लिए नहीं खुल कर खेलने के लिए मिला है। ऐसी बोधगम्य पुस्तकें और गीता सत्रों में उपस्थिति जीवन में चार चांद लगा देती है

"डर" भय की वास्तविक प्रकृति को उजागर करती है और दिखाती है कि डर सिर्फ बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारे मन की conditioning और अज्ञान से उपजता है। यह पुस्तक डर को समझने और उससे परे जाने की दिशा में एक गहरी आध्यात्मिक और तार्किक दृष्टि प्रदान करती है। सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में लिखी गई यह पुस्तक पाठक को आत्मबोध और निर्भयता की ओर प्रेरित करती है, जिससे जीवन में अधिक स्पष्टता और स्वतंत्रता सं...