Combo books @99/book! 60+ combos available. FREE DELIVERY! 😎🔥
AP Books
डर [राष्ट्रीय बेस्टसेलर]
सहायता की प्रतीक्षा व्यर्थ है
badge
book
ई-पुस्तक ले चुके हैं?
लॉगिन करें
ई-पुस्तक
तत्काल उपलब्ध
सुझायी सहयोग राशि
₹51
₹150
पेपरबैक
स्टॉक उपलब्ध
48% छूट
₹129
₹250
अब आप सर्वोत्तम पढ़ने के अनुभव के लिए हमारे मोबाइल ऐप पर ईबुक पढ़ सकते हैं ऐप देखें
मात्रा:
1
स्टॉक में
मुफ़्त डिलीवरी
पुस्तक का विवरण
भाषा
hindi
प्रिंट की लम्बाई
202
विवरण
अपूर्णता का विचार ही भय का जन्मदाता है।

अविवेकी मन उस विचार पर विश्वास कर भयभीत हो उठता है और अपूर्णता के उपचारस्वरूप पाशविक वृत्तियों का अवलम्बन कर लेता है। इसी विचार को सत्य मानकर वह संसार द्वारा प्रदत्त वस्तुओं पर आश्रित हो जाता है, चाहे वो रिश्ते-नाते हों, चाहे रुपये-पैसे अथवा पद-प्रतिष्ठा। और चूँकि संसार निरन्तर परिवर्तनशील है अतः उसका सम्पूर्ण जीवन ही भय और दुख के साये में व्यतीत होता है। जिसके कारण उसे सहस्त्र दुखों से गुज़रना पड़ता है।

आचार्य प्रशांत इन संवादों के माध्यम से अपूर्णता के विचार को अकिंचित्कर बताकर उसका तिरस्कार करके एक विवेकपूर्ण जीवन जीने का सन्मार्ग बताते हैं।
अनुक्रमणिका
1. डर (भाग-१): डर की शुरुआत 2. डर (भाग-२): डर, एक हास्यास्पद भूल 3. डर (भाग-३): डर से मुक्ति 4. मन नये से डरता है 5. संचय और डर 6. निर्णय के लिए दूसरों पर निर्भरता
View all chapters
क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है?
आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
योगदान दें