
सावित्री जी, डर को काबू में करना सीख रही हो, ये अच्छा है, पर एक बार देखना कि काबू करना और डर के मिटने में फर्क है। काबू का मतलब है डर अभी भी है, बस उस पर एक ढक्कन लगा दिया है, दबा दिया है। दबा हुआ डर गया नहीं, बस चुप बैठ गया है, मौका मिलते ही फिर उठेगा। असली सवाल ये नहीं कि डर को कैसे दबाऊं, बल्कि ये कि डर आ किससे रहा है, वो क्या चीज़ है जो छिनने का डर लग रहा है। उसे साफ साफ देखने से जो होगा, वो क...