प्रणाम आचार्य जी जबरदस्त किताब है, एक बार में तो समझ ही नहीं आतीं हैं आपकी बातें. लेकिन ज़ब आयी तो दुनिया ही 360 डिग्री से घूम गयी. धन्यवाद