
इस पुस्तक में आचार्य जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से डर को समझाया है| तथा उसकी निवारण के तरीके भी सुझाए हैं| डर किस प्रकार अज्ञानता वश हमारे अंदर आ जाता है तथा हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करता है| डर हमारी प्रतिभा को कैसे संकुचित करता है तथा उसके द्वारा हमारे जीवन की कितनी हानि होती है| यह सभी इस पुस्तक में अच्छे से समझाया गया है| जो भी डर से जूझ रहा हो उसको यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए कि डर का सामना ...