✍🏻 पोस्ट 23 | 4 अक्टूबर '26💭 विषय — ग्लोबल करंट अफ़ेयर्स──────────🐾 विश्व पशु संरक्षण दिवस पर एक संदेश
आज 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस है। 2026 की आधिकारिक थीम है, “See the World Through Their Eyes”, यानी “दुनिया को उनकी आँखों से देखिए।”
यह थीम हमें अपनी मानव-केंद्रित दृष्टि से बाहर निकलकर यह देखने के लिए कहती है कि हमारी गतिविधियों और फैसलों का असर दूसरे जीवों की दुनिया पर कैसा पड़ रहा है।
🐘 इसमें हाथी, बाघ और अन्य वन्यजीवों से ल…
मेरा तो ये सोच कर ही दिल भर आता है, एक तड़प सी उठती हैं, 🥺🥺 , kyse अपने स्वाद के लिये किसी मासूमो की जान, वो kyse लोग , कितने क्रूर, निर्दये होगे जिनके हाथ नही kampte, दिल नही machlta, kha kyse lete h 😒😒😒
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Tanya Rajput
bahut pravabh padta hai. hmare lok prachlit festival se jaise. bomb patakhe fodna mithaiyan.
Revati Mahila Kisan
बिल्कुल सवाल उठेगा
और इसके लिए मुझे करुणा कर्तव्य का पालन करना है।
और इसके लिए जड़ा से जड़ा लोगो को गीता सत्रों तक ले आना है।
वर्तमान समय में यही सबसे उचित कदम है
Braj mohan
यदि हमने जानवरों की दुनिया को सच में सही नजरिया से देखा है और हमारी नियत साफ है तो हमें भी उनका दर्द और उनके संवेग नजर आएंगे l फिर हम जानवरों की दुनिया को अपनी दुनिया से अलग नहीं देख पाएंगे l नजर में यदि गहराई होगी तो हमें पता चलेगा कि सभी जीव जंतु और खुद मनुष्य सभी प्रकृति के ही हिस्सा है l जो चीज हमें अलग-अलग नजर आती हैं या फिर हम अपने लिए उनका इस्तेमाल करते हैं तो यह सारा काम अहंकार का है l
जब तक इंसान अहंकार को नहीं जानेगा यह द्वैत का भाव मिटेगा नहीं और यह अहंकार के लिए बहुत जरूरी है l यदि द्वैत मिट गया तो अहंकार को भी मिटाना पड़ेगा l
Sonam
अगर हम दुनिया को उनकी आंखों से देखें तो हमारे जीवन शैली पर सवाल तो उठेगा ही क्योंकि उसी दुनिया में से एक हम भी हैं हम उपभोग करने के चक्कर में इतने अंधे हो गए हैं कि हमें अपनी क्रूरता ही दिखाई नहीं देती मानव जाति अपने स्वाद के लिए पशु ,पक्षियों को भी नहीं छोड़ रही है एक मानव जाति ने हीं पशु पक्षियों की जिंदगी कितनी बदल बदल दी है
Kusum
अगर हम दुनिया को उनकी आंखो से देख रहे होते तो प्रकृति का इतना विनाश ही नहीं होता। हम तो सिर्फ अपने अंदर बैठे अहंकार को ही पाल -पोश कर बड़ा कर रहे हैं। यही अहंकार हमारी प्रकृति का विनाशकारक है।
Sandhya rani sahoo
अगर मुझे कुछ बातें पढ़ाया नहीं गया होता ,
अगर मुझे बचपन से शाकाहारी रखा जाता और जैसे स्कूलों मै पढ़ाया जाता है कि मुर्गी और बतख अंडा देते है
मुर्गा , बकरी जैसे जानवर मिट गिविंग अनिमाल कह कर पढ़ाया जाता है
गाय को मिल्क गिविंग अनिमाल कहकर पढ़ाया जाता है
लेकिन असलियत कुछ और है
मुर्गी और बतख इंसान खाए इसलिए अंडा देती है या उनसे जबरदस्ती अंडा निकलवाया जा रहा है
गाय अपनी बच्चे के लिए नहीं इंसान के बच्चे जवान बूढ़ो के लिए दूध देती है ,या इंसान उसके बच्चे को उससे दूर रखकर सारा दूध अपने मुनाफ के लिए निकल लेती है
और मांस देना ,मुर्गा ,मुर्गी बकरी ये अपने मांस खुद काटते है और इंसान को भी खुद देते है ये लो हमारी मांस खाओ
ऐसा पढ़ाना कहां तक सही है ,बो भी बचपन से
ज्यों का त्यों क्यों नहीं पढ़ाया जा सकता स्कूल भी ऐसा गलत शिक्षा कैसे दे सकती है ।
और ये सारी बात किसीको दुखसे देखने लगे तो बो कैसे इन सारी चीजों को खाने मै शामिल कैसे कर सकता है ।
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युगेश्वरी साहू
" मैं" अपनी जरूरत और इच्छाओं को इतना स्वाभाविक मान लेता है कि उसे जीव की दृष्टि से देखना ही भूल जाता है जो मैं की सुविधा की कीमत चुका रहा है।
अहंकार अगर प्रत्येक जीव को सम दृष्टि से देखें तो यह जगत कितना सुंदर होगा।
Saloni
जी बिल्कुल उठेगा क्योंकि इंसान तो किसी को देखता भी है तो स्वार्थ के भाव से।
सभी प्राणियों में एकदम निकृष्टतम प्राणी " मनुष्य" है। कुत्ता, बिल्ली, भेड़ , बकरी यहां तक कि शेर भी पेट भरे होने पर अपने शिकार(किसी भी जीव) को नहीं मारता है लेकिन मनुष्य पेट भरा होने पर भी दूसरे की जान लेने पर तुले हुए रहता है। इंसान अपने स्वार्थ के खातिर अपने सगे संबंधियों को भी मार देता है।
इंसान तो प्रेम भी स्वार्थ के लिए करता है।
इसलिए हमारे महापुरुषों ने कहा है -
स्वार्थ लागी करैं सब प्रीति, सुर नर मुनि जन की यह रीति।
neelam Digrase
❓ अगर हम सच में दुनिया को उनकी आँखों से देखें, तो क्या हमारी अपनी जीवनशैली पर भी कोई सवाल उठेगा?
हा, पूरे सवाल के घेरे मैं ही हूं । बाकी सब अपनी जगह (प्रकृति) ठीक है ।
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Tanu
bilkul उठेगा
Simmi singh
जब हम दुनिया को उनकी आंखों से देखें तो हमें पता चलेगा कि उनमें कितनी कर है, जो हम उनके साथ करते हैं।
जो पीड़ा और दर्द हम उनको देते हैं जो डर उनके अंदर रहता है।
तू हमें पता चलेगा कि हम उनके साथ कितना बुरा करते हैं
Kiran choyal
मेरे घर में भी एक कुता है, जिसको मेरे घर वालों ने पाल रखा है वो उसको बांध कर रखते है , जब कोई भी बाहर जा रहा होता है ,तो वो बहुत ही ज्यादा भोंकता है जैसे कि वो भी स्वयं की स्वतंत्रता चाह रहा हो। मैने अपने घर वालों को बोला भी इसको स्वतंत्र कर दो पर वो मेरी बात मानते ही नहीं है। आजकल उनके ऊपर काम का थोड़ा प्रेशर है ,तो उन्होंने उसको खुला छोड़ दिया है ,उसको जब भूख लगती है तो वो सिर्फ खाना खाने के लिए आता है।
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Vinit
❓ अगर हम सच में दुनिया को उनकी आँखों से देखें, तो क्या हमारी अपनी जीवनशैली पर भी कोई सवाल उठेगा?
➡️हा , हमारी जीवनशैली पर सवाल उठेगा , सवाल ही नहीं कराह उठेगी। एक जीव के सबसे बड़ी पूंजी स्वतंत्रता होती है ,और वो कहां मिल पा रही है इस पृथ्वी के पशु पक्षियों को। उनकी आँखों से देखे तो हम उनको खाने को आ रहे है। उनमें ये डर लगा रहता है कि कब मौत आ जाए , हम मनुष्य उन्हें सुरक्षा व प्रेम के नाम पर बस मौत दे रहे है। उनको पृथ्वी पर बस मार काट दिखाई देगी ,उनको डर ,गुलामी , प्रदूषित वातावरण दिखाई देगा। हमारी जीवनशैली ने उनको भोग बना लिया है , हर दिन उनकी देह हमारा खाना बन गई है ,उनके प्राणों की कोई परवाह किए बिना बस खाए जा रहे है। माना वो हमसे लड़ नहीं सकते ,बोल नहीं सकते पर प्राण ,भाव ,जीव तो वो भी है। पीड़ा उनको भी होती है ,पर मनुष्य इतना ज्यादा क्रूर हो गया है वह जानवर को तो क्या अपनी प्रजाति को नहीं छोड़ता। उनकी निगाहों में पृथ्वी पर आग दिखाई देती है , जैसे सब जल रहा है।जब तक मनुष्य खुद को सही नियति से नहीं देखेगा तो वो अपने साथ भी ऐसे ही करेगा व पशुओं के साथ भी।
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abhishek kumar
अगर हम दुनिया को उनकी आंखों से देखते हैं तो पता चलता है कि हम इंसान दुनिया पर कब्ज़ा कर के रखे हुए हैं | उनके लिए कोई जगह नहीं छोड़ी है | गुलाम बना कर रखा है या अपना भोजन बना कर रखा है |
बस अपनी कामनाओं और लालसाओं की पूर्ति करने की वस्तु मात्र मान रखा है उनको |
फिर जानवर ये देख कर और भी उदास होते हैं कि ये इंसान तो खुद एक दूसरे से लड़ते रहते हैं और अपने से कमज़ोर इंसानों का शोषण करते हैं| इससे उनका मनोबल और टूटता है कि इंसान कभी भी जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार कर सकता है|
Kashyap payal Payal
pranam acharya ji lekin hm aise kuy hmari chetna itni giri h ki hm pashuon ,or jo v prakritik samsye h unko dekh ke kuch smjhte kuy unka dard kuy nhi smjh ata ,koi fark hi nhi parta kaha kya chal rha bs apne jivan ko sawrna mai ,khane m or apni vritiyon ko sukh dene m kuy ,hm asli chiz dekh kuy nhi pate yhi sawal h .
Pooja
सौ बात की एक बात 🥲
हम हमारे स्वार्थों के लिए पूरी पृथ्वी का शोषण करते है 🧐
Durga Rathod
जी बिल्कुल सही है हम दुनिया को उनकी आँखों से देखे तो, तो हमारी अपनी जीवनशैली पर सवाल उठेगा, और उठना भी चाहिए।
हम हमारे स्वाद, और लालच के लिए पशु पक्षी को एक उपभोग की वस्तु मात्र समझ बैठे हैं, जो कि गलत है, क्योंकि पशु पक्षी हमारी तरह ही प्रकृति का हिस्सा है, वे भी जीव है।
मै भी कभी इनमेसे थी, मांसाहार करती थी, मगर जबसे आचार्य जी ने पशु हिंसा के बारे में समझाया है, मैने तबसे मांसाहार एकदम बंद कर दिया। और अब कितना भी खाने का मन करता है, आचार्य जी की शिक्षाएं याद आ जाती है, और मै मांसाहार का विचार भी त्याग देती हूँ। मै ये कभी समझ नहीं पाती, कि पशु भी हमारी ही तरह है, वे भी निर्दोष जीव ही है । क्योंकि बचपन से मेरी कंडीशनिंग ही ऐसी थी, न किसी ने कभी इस विषय पर मुझे बताया, मै अज्ञान में ही जी रही थी।
पशु पक्षी, हर जीव बस प्रेम के योग्य है न कि उनका भोग करना, और न उनका मांस खाना। धन्यवाद आचार्य जी 🙏 आप ने ही मुझे ये देखने के लिए प्रेरित किया है, नहीं तो मै यूंही अज्ञान में जीती रहती।
Babita Shukla
prakarti ne sabke liye jaise ye hawa paani pahad banaye usi tarah ye dharti Or us pr rahne Or jine ki sukh suvidhayen bhi sabke liye saman banai hai kintu soch kr afsos hota hai ki insaan maatr hi aisa jiv hai jise apne liye sab kuch chaiye koi fark nahi padta ki usse kisi anaye jiv pr kya asar hoga
lekin fir bhi sochna to padega or karna bhi padega vanye jivo ko bachane ke liye
Pratibha Verma
अगर हम उनकी आँखों से इस दुनिया को देखंगे तो पाएंगे कि मानव कितना निर्दयी और क्रूर है, जो अपनी जरूरतों के लिए जीवो पर अत्याचार करता है, साथ ही यह भी पाएंगे कि मानव कि भूख कभी मीटती नहीं है बल्कि और बढ़ती जाती है।
Shilpee
सभी मनुष्य को सचमुच पशु को उनकी आँखों से देखना चाहिए , कहना चाहते हैं वो हमे भी जीना हैं खुश रहना हैं.....
kumari rani
एकदम सवाल उठना लाजमी है, और यह दिवस है इसे 365.दिन वही बने रहे जो एक खास दिन को करते हैं। मौखिक नहीं, लिखित नहीं सिर्फ प्रयोग करें। हमें यह सुविधा मिल गई है कि एक दिन दिवस मना लेते हैं, और फिर जैसे का तैसा।
Priyanka Aggarwal
बिल्कुल उठेगा l
Dinesh bhandari
Social reform can't be possible without neglecting the animals. Animals must be a part of the world.
Shilpi mahato
हम अगर दुनिया को सच मे उनकी नज़र से देखे तो शायद उनसे ज्यादा खुश और कोई नही होगा।
Jayshree
अगर हम उनकी आँखों से देखने की कोशिश करे तो उनका दर्द हमें महसूस होगा
।
Kamlesh Sharma
यदि हम दुनिया को पशु की दृष्टि से देखे तो, अहंकार का , माने हमारा कुछ भी नहीं है, जो हम अपना अधिकार माने बैठे हैं, ये अहंकार है जो अपूर्ण हैं और इसे पूर्ण करने के लिए विषयों से लिप्त रहता है! वो सब्रका भोग करना चाहता है, चाहे फिर वो पशु हो , मछली या फिर कोई भी जीव !
Vinay
बिलियन में जान गई जान तो गई न सवाल हमसे ही पूछा जाएगा हमारी वजह से गई क्या हमारे लिए जान कीमत बहुत कम हो गई है या हम इतने क्रूर हो गए है ..?? बदलना बहुत ज्यादा जरूरी है ऐसा जीवन नहीं चाहिए जो किसी जान लेकर बने ।।
Dk Yadav
जब हम उनकी आँखों से देखते हैं तो पता चलता है कि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हमारे करने से इनपर बहुत बुरा असर पड़ता है। हमने इन्हें एक उत्पाद सा बना लिए हैं जो सिर्फ हमारे ही प्रयोग में आ सके , हमारे लिए सुविधाएं ल सके।
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Sandhya kushwaha
हमें जीवों पर दया करनी चाहिए
✍🏻 पोस्ट 23 | 4 अक्टूबर '26 💭 विषय — ग्लोबल करंट अफ़ेयर्स ────────── 🐾 विश्व पशु संरक्षण…