
Durga Rathod
जी बिल्कुल सही है हम दुनिया को उनकी आँखों से देखे तो, तो हमारी अपनी जीवनशैली पर सवाल उठेगा, और उठना भी चाहिए। हम हमारे स्वाद, और लालच के लिए पशु पक्षी को एक उपभोग की वस्तु मात्र समझ बैठे हैं, जो कि गलत है, क्योंकि पशु पक्षी हमारी तरह ही प्रकृति का हिस्सा है, वे भी जीव है। मै भी कभी इनमेसे थी, मांसाहार करती थी, मगर जबसे आचार्य जी ने पशु हिंसा के बारे में समझाया है, मैने तबसे मांसाहार एकदम बंद कर दिया। और अब कितना भी खाने का मन करता है, आचार्य जी…















