अगर हम दुनिया को उनकी आंखो से देख रहे होते तो प्रकृति का इतना विनाश ही नहीं होता। हम तो…
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Kusum
अगर हम दुनिया को उनकी आंखो से देख रहे होते तो प्रकृति का इतना विनाश ही नहीं होता। हम तो सिर्फ अपने अंदर बैठे अहंकार को ही पाल -पोश कर बड़ा कर रहे हैं। यही अहंकार हमारी प्रकृति का विनाशकारक है।