
Kamlesh Sharma
यदि हम दुनिया को पशु की दृष्टि से देखे तो, अहंकार का , माने हमारा कुछ भी नहीं है, जो हम अपना अधिकार माने बैठे हैं, ये अहंकार है जो अपूर्ण हैं और इसे पूर्ण करने के लिए विषयों से लिप्त रहता है! वो सब्रका भोग करना चाहता है, चाहे फिर वो पशु हो , मछली या फिर कोई भी जीव !















