✍🏻 पोस्ट 18 | 28 अगस्त ’26💭 विषय — इंडियन करंट अफेयर्स───────────☕ एक कप चाय की कीमत कौन चुका रहा है?
❓ सुबह की चाय हमें सस्ती और साधारण लगती है। लेकिन उस एक कप तक पहुँचने के पीछे खेत, मौसम, मजदूर और बाजार की पूरी श्रृंखला काम करती है।
🌿 DW की 26 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, असम भारत की लगभग 52% चाय पैदा करता है। बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश, बाढ़, कमजोर चाय कीमतें और बढ़ती उत्पादन लागत इस व्यवस्था पर दबाव डाल रही हैं।
🌡️ असम के…
ye gorib log chuka rohe hay kuki un logo kay pass shiksha nhi hay koye kuch vi korta hay ..
Pankaj
🙏
Priti
Asli Kimat koior lerha he
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Babita Jain
bilkul mujko to khaney piney se matlab raha h kabhi sochtey nahi ki iskey pichey ki mahnat
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Rajni Singh
बाप रे ! ऐसे तो कभी सोचा ही नहीं। हम तो बस कौन-सी ब्रांड की चायपत्ती अच्छी है, जो पीने में स्वादिष्ट लगे, इससे आगे का तो कभी सोचा ही नहीं 😔
आदत क्या लत लग चुकी है चाय पीने की, कोशिश करूंगी धीरे धीरे कम करते हुए बिल्कुल ही नहीं पीने की।
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G
Gyaneshwari Baghel
चाय की शुरुआत से हमारा दिन तरोताज़ा हो जाता हैं, फिर चाहे वह किसी दोस्त के साथ बैठे हों या किसी अपरिचित के साथ। चाय हमारी देश में परिवार की एक बहुमूल्य जरूरत समझी जाती हैं लेकिन इस बीच हम उसके उगने से लेकर बनने तक की प्रक्रिया में शामिल लोगों को भूल जाते हैं। जो सुबह उठते ही दोपहर की कड़ी दोपहरी से शाम तक लगे रहते हैं मगर फिर भी उनकी कमाई यही मात्र दिनभर की 150/-,250/तक रह जाती हैं। जिस सस्ती चीज़ को लेने हम होड़ लगा रहे हैं असल में उसकी कीमत कोई ओर ही चुका रहा होता हैं।
मुझे कभी-कभी गुड़ की चाय पीनी पसंद हैं, मगर गुड़ की एक छोटी बेल(गोली) की कीमत 60,50/- तक होती हैं। मुझे मालुम है कि वह कहीं लंबी प्रक्रिया से गुजर कर अब गुड़ के रूप में प्राप्त हुई है लेकिन फ़िर भी मैं उसे किसान से 30,40/की कीमत ही लेना चाहती हूं। उस वक्त मेरी नीयत में सिर्फ अपनी जरूरत दिखती हैं लेकिन मैं यह भूला देना चाहती हूं कि इसकी कीमत कोई ओर चुका रहा है।
यह अहंकार नहीं तो और क्या है!
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B
bhuwan Chandra Joshi
sir fir bhi hindustan ke her aadmi ko do waqt ki chaye mayassar nahi hoti hai?
Mamta Sirdar
हम इस तरीके से गहराई में जाकर कभी सोचते ही नहीं है सोचते तो हमारी एक कप चाय की कीमत समझ में आ जाती।
Shraddha Devganiya
पूरा आंकलन कभी नहीं किया।
jiten beniwal
मैनें कभी उनके बारे में सोचा ही नहीं जिनकी वजह से मेरा बहीखाता पूरा रहता है हमेशा। आज जब यह देखा तब पता चला कि कोई और है, जो अपने बहीखाते को खाली रखता है, तब मेरा बहीखाता पूरा हो रहा है।
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Hridesh Chandra
मैंने अत्याचार वाले दूध की चाय छोड़ दी स्थाई रूप से। अब सिर्फ घर में उगायें गए लेमन ग्रास की चाय पीता हूं। जो ज्यादा हेल्दी है। फिर भी चाय क्यों सस्ती है , का असल कारण भी पता है।इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में हरी मिर्च तोड़ने वाले मजदूरों को भी बहुत कम रूपये यानी दिन के 150 से 250 दिए जाते हैं।।इस प्रकार हरी मिर्च भी शोषण से प्राप्त होती है।
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SUNIL KUMAR
हम साफ़ साफ़ देखना नहीं चाहते
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Reeta Gautam
असली कीमत के बारे में कभी नहीं सोचा
Gyanendra Singh
मेरी सुविधा का बहीखाता अधूरा है क्योंकि इसमें वो कीमत नहीं जुड़ती जो किसी दूसरे ने चुकाई।
Dil Maya
sach me mere bahikhata ka wo kimat koi or chuka raha he.
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Makkhan Lal Achara
मेरे बहीखाते में असली क़ीमत ग़ायब रहतीं हैं।
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Sanket Sudhakar Mahajan
❓ “क्या मेरी सुविधा का बहीखाता पूरा है, या उसमें वह कीमत गायब है जो कोई और चुका रहा है?”
👉🏽मेरा बहीखाता पुरा नही हैं |
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ANKESH
प्र:क्या मेरी सुविधा का बहीखाता पूरा है, या उसमें वह कीमत गायब है जो कोई और चुका रहा है?
: मेरा वही खता मेरी तरह ही अधूरा है उसमें वह कीमत गायब है जिसे कोई और चुका रहा है। मेरे वही खाता में ये सवाल शामिल नहीं है कि मैं क्या खरीद रहा हूँ, क्यों खरीद रहा हूँ और मेरे चुनाव की कीमत कौन चुका रहा है?
Neeta
स्वयं पर ध्यान देने वाली बात दिखी कि मैं क्या खरीद रही हूं? क्यों खरीद रही हूं? और जिस कीमत पर खरीद रही हूं क्या वह उसकी सही कीमत है ?उसे देखना और साथ ही अपनी नियत भी देखना।
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Priyanka yadav
बहीखाता रखना जरुरी है।
Sneha Pawar
Someone else is paying the cost and i am in my own oblivion.😐
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Rahul
सीख: बहीखाता रखना भी सही हो सकता है, बशर्ते वह व्यक्तिगत आत्म-रक्षण के बजाय समष्टि को ध्यान में रखकर रखा जाए, जिसमें जंगल, पहाड़, जीव-जंतु, मनुष्य सभी शामिल हो। 🙏
Vinit
मुझे ये बात बढ़िया लगी कि, मैं क्या खरीद रहा हूँ, क्यों खरीद रहा हूँ और मेरे चुनाव की कीमत कौन चुका रहा है?
जब से आचार्य जी से जुड़ा हू,मुझे याद ही नहीं रहता की चाय पीनी है या नहीं, एसे करते करते मेरी चाय की लत भी छूट गयी। सही कार्य में जुटने से अहंकार भी खत्म होने लगता है।
पर अब पता चल रहा है कि मेरे चुनाव की कीमत कौन चुका रहा है।
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JITESH KUMAR TELI
❓ “क्या मेरी सुविधा का बहीखाता पूरा है, या उसमें वह कीमत गायब है जो कोई और चुका रहा है?”
किसी भी वस्तु का उपभोग करने से पहले मुझे देखना होगा कि यह आवश्यक भी है या नहीं।
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S
Sujeet
bahut glt ho raha hai
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dheerajkuntal
#talking mirror
ese to sir, lgbhag sabhi vastuo k base product ko dekhe to vo prakriti se aati h,
to kya use kam kar dene chahiye,or kya kya kam krege sabhi to prakriti se ata h
Sohan Singh
Thanks for sharing this.
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