चाय की शुरुआत से हमारा दिन तरोताज़ा हो जाता हैं, फिर चाहे वह किसी दोस्त के साथ बैठे हों या किसी अपरिचित के साथ। चाय हमारी देश में परिवार की एक बहुमूल्य जरूरत समझी जाती हैं लेकिन इस बीच हम उसके उगने से लेकर बनने तक की प्रक्रिया में शामिल लोगों को भूल जाते हैं। जो सुबह उठते ही दोपहर की कड़ी दोपहरी से शाम तक लगे रहते हैं मगर फिर भी उनकी कमाई यही मात्र दिनभर की 150/-,250/तक रह जाती हैं। जिस सस्ती चीज़ को लेने हम होड़ लगा रहे हैं असल में उसकी कीमत कोई…
















