✍🏻 पोस्ट 1 | 03 अक्टूबर'26
💭 विषय — इंडियन करेंट अफेयर्स──────────
🟤 एक तम्बाकू की लत… और उसके पीछे छिपी बहुत बड़ी कीमत।
हमारे आसपास तंबाकू चबाना इतना आम है कि उसका खतरा दिखाई ही नहीं देता। लेकिन एक नई वैश्विक स्वास्थ्य-अध्ययन इसकी बड़ी तस्वीर सामने रखता है।
📊 The Lancet Global Health में प्रकाशित Global Burden of Disease Study 2023 के अनुसार, 2023 में दुनिया में करीब 24.1 करोड़ लोग चबाने वाला तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे।
🌏 _उसी साल…
पिछले 10 वर्षों में मेरे निजी स्थान पर तंबाकू नशा लगभग दो गुना फैल गया है। युवा वर्ग इससे ज्यादा ग्रस्त है।
Prasad
जी हाँ।
Ravi Shrivas
पान और गुडाखु यें दो नशे है, जो झून्नू लाल मैंने पकड़ रखे है।
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Yogesh Yadav
मैं भी कोई नशा नहीं करता हूं
Swati singh
मैं बाहर से कोई नशा नहीं करती पर ये अहम का नशा तो है। मेरे घर में मेरे पापा ,भाई नशा करते हैं ,तंबाकू ,गुटखा वगैरह ।
ANKESH
🔎 क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी आदत है, जिसकी कीमत दिखाई देने के बाद भी आप उसे पकड़े हुए हैं?
हाँ मैं भी तंबाकू और बीड़ी का सेवन करता हूँ हालांकि अब पहले जैसा चेन स्मोकिंग की समस्या नहीं है जैसे पहले थी कॉलेज के दिनों में हर दिन कहता हूँ कल छोड़ दूंगा पर नहीं छोङने का चुनाव करता रहता हूँ ।
Deependra
मै भी कोई नशा नहीं करता हु ना ही कभी किया हु।
Shudhakar Pandey
हां मैं भी तंबाकू का सेवन करता हूं बहुत कोशिश करता हूं पर छूटती ही नहीं है।
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Anu bala
past में ज्यादा खोये रहना , किसी बात को बार बार सोचना, आलस्य , सोशल मीडिया , दूसरों पर ज्यादा ध्यान रहना ,खाने को बहुत जल्दी जल्दी खाना ,ज्यादा सोने की आदत ।
SAGAR VVAGDRE
हाँ, मेरे जीवन में भी ऐसी एक आदत है—रील्स स्क्रॉल करने की। शुरुआत में मुझे यह सिर्फ कुछ मिनटों का मनोरंजन और छोटी-सी जरूरत लगती थी, लेकिन अब मुझे समझ में आ रहा है कि इसकी कीमत सिर्फ समय की नहीं है।
रील देखते-देखते मेरा ध्यान बिखरता है, मन लगातार उत्तेजना और नई चीजों के पीछे भागता है, वास्तविक कामों से बचने की आदत बढ़ती है और मेरे भीतर कल्पनाओं की दुनिया और मजबूत होती जाती है। मुझे पता है कि यह मेरे लिए नुकसानदायक है, फिर भी मैं बार-बार उसी आदत की तरफ लौट जाता हूँ।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मुझे इसकी कीमत दिखाई दे रही है, लेकिन आदत अभी भी छूटी नहीं है। इसलिए अब इसे “बस थोड़ी देर का मनोरंजन” कहकर खुद को धोखा देना ईमानदारी नहीं होगी।
मेरे लिए असली सवाल यह नहीं है कि रील देखने में कितना सुख मिलता है, बल्कि यह है कि उस कुछ मिनट के सुख के बदले मैं अपने जीवन से क्या खो रहा हूँ।
और शायद अब मुझे इसका उत्तर भी पता है—मैं अपना समय, ध्यान, एकाग्रता और वास्तविक जीवन में काम करने की क्षमता खो रहा हूँ।
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Pushpa Lahu Dudhabhate
नही, ऐसी कोई आदत मेरे जीवन में नहीं है|
Ladli Kumari
आलस्य और टालमटोल
Vinay
सभी प्रकार का नशा त्याग दिया हु लेकिन कल्पनाओं में खो जाना घंटों तक ये सही करने की कौशिश में हु ।।
Vimal Tiwari
पहले गुटका नहीं खाता था अब कभी-कभी खाता हूं
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GAJJAR BHAVESHKUMAR PRABHUDAS
चाय पीना मेरी बुरी आदत है । ये जानते हुए कि चाय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन मेरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए मैंने चाय पीना कम जरूर कर दिया है।
RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी 90% मैंने डायरी प्रोडक्ट छोड़ दिया है और प्रयास में हूं धन्यवाद
Dharmesh
काम टालने की आदत। ये पता होने के बाद भी कि मेरे पास ज्यादा समय नहीं है और मैं ग़लत जगह फंसा हूं।
Amrita
मुझमें काम को टालने की आदत है,
जैसे कि पढ़ाई।
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Rashmi
हां, मैं दूध का सेवन नहीं छोड़ पा रही हूं।😞
Manish kumar Mishra
मौत हैं साक्षात किसी भी प्रकार का व्यसन।
Nibha kumari
हा मेरे साथ एक बुरी आदत है कि एक hrs का काम में बहुत ज्यादा समय लग जाते है और यूट्यूब पर शॉर्ट्स देखते है to पता ही नहीं चल रहा होता है कि कब आधा घंटा बीत गया, और कभी कभी लोगों से बिना मतलब बाते करना जो सिर्फ समय बर्बादी होती है
YOGITA RAJPUT
🔎 क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी आदत है, जिसकी कीमत दिखाई देने के बाद भी आप उसे पकड़े हुए हैं?
हाँ, मेरे जीवन में स्वादिष्ट खाने की लालसा बहुत सघन है। जिसके कारण मेरे शरीर पर इसका बहुत गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।
ढाक के तीन पात वाली कहानी है मेरे साथ।
Seeing ही काफी नहीं, मेरी नीयत नहीं है इससे पार हो जाने की। हर बार एक ही चुनाव, स्वादिष्ट खाने को ना कैसे कह दूँ और फिर उसका दाम चुकाना।
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Shalini devi
mere me bhut kamiya hai 💫💫
Seema Verma
हां आलस्य को नहीं छोड़ पाती हूं 😔
ANKIT RAJ
Bhitari darr jo bana rahta hai, ab dhere dhere jaan ne ka aur kam karne ka kaam ho rha hai.
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Sanjeev Kumar suman
मैंने अपने जीवन में लगभग 1995 से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन शुरू किया था। उस समय मैं नौवीं कक्षा में पढ़ता था। धीरे-धीरे यह मेरी आदत बनती चली गई। उस समय शायद मुझे यह समझ भी नहीं थी कि मैं अपने शरीर और मन के साथ क्या कर रहा हूँ।
कई वर्षों तक मैं इस आदत में उलझा रहा। कभी यह नहीं सोचा कि आखिर मुझे नशे की आवश्यकता क्यों पड़ती है? मैं अपने भीतर ऐसी कौन-सी परिस्थिति या बेचैनी महसूस करता था, जिससे बचने के लिए नशे का सहारा लेता था?
जब मैं आचार्य जी के विचारों और संगठन से जुड़ा, तब धीरे-धीरे अपने जीवन को देखने और समझने का अवसर मिला। उनकी शिक्षाओं के माध्यम से अपने आचरण, आदतों और मान्यताओं पर प्रश्न उठाने लगा।
आज मैं पूरी तरह से नशे से दूर हूँ। मेरे पास किसी भी प्रकार का नशा नहीं है और मैं उसका सेवन भी नहीं करता हूँ।
लेकिन इस अनुभव ने मेरे सामने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया है।
क्या केवल नशा छोड़ देना ही पर्याप्त है? या मुझे उस मानसिकता को भी समझना होगा, जिसने इतने वर्षों तक मुझे नशे का गुलाम बनाए रखा?
मैंने महसूस किया कि नशा केवल किसी पदार्थ का सेवन नहीं है, बल्कि कई बार यह अपने भीतर की बेचैनी, खालीपन और असंतोष से भागने का एक माध्यम भी बन जाता है।
अब मेरा प्रयास केवल नशे से दूर रहने का नहीं, बल्कि अपने मन को समझने का भी है। मैं यह देखना चाहता हूँ कि कहीं मैं किसी दूसरी आदत, आकर्षण या मान्यता का गुलाम तो नहीं बन रहा हूँ।
मेरे लिए इस यात्रा का वास्तविक अर्थ यही है कि जीवन को बेहोशी में नहीं, बल्कि समझदारी और जागरूकता के साथ जिया जाए।
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Sapna kumari
दिनचर्या में ऐसे कई आदत रही है ,जिनपर पहले बिल्कुल भी परिणाम के बारे में सोचती नहीं थी पर अब ध्यान एकदम ही अटक जाता है । जैसे :- स्वास्थ्य वर्धक खान पान , मोबाइल के वीडियो कंटेंट, ड्रेसिंग सेंस
ऐसी कई बातों पर अमल करना शुरू कर दी हैं।
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Gautam kasera
अभी भी मेरे जीवन में मैं अपनी बेचैनी से बचने के लिए मनोरंजन, सोशल मीडिया, अत्याधिक सोना और स्वयं को देखने के बजाय विषयों की ओर भागने की आदत है, जिसकी कीमत दिखाई देने के बाद भी मैं उसे पकड़े हुए हूॅं।
Madhu
जी मेरे जीवन में भी आलस का आदत है जीसे मैं इसे ऐसे ही छोड़ देती हूँ
Kiran
aacharya ji ko sunne bethti hu to lagta he reel dekh lu lekin fir nahi dekhti aacharya ji se hame seekhne ko milta he reel se nahi
✍🏻 पोस्ट 1 | 03 अक्टूबर'26 💭 विषय — इंडियन करेंट अफेयर्स ────────── 🟤 एक तम्बाकू की लत……