
Shudhakar Pandey
हां मैं भी तंबाकू का सेवन करता हूं बहुत कोशिश करता हूं पर छूटती ही नहीं है।
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हां मैं भी तंबाकू का सेवन करता हूं बहुत कोशिश करता हूं पर छूटती ही नहीं है।

शुधाकर जी, आपने लिखा कोशिश करता हूं पर छूटती ही नहीं है। ज़रा देखिए, यह वाक्य कोशिश को हारा हुआ बता रहा है, पर कोशिश किसके खिलाफ हो रही है। तंबाकू के खिलाफ, या उस बेचैनी के खिलाफ जो तंबाकू मांगती है। अगर लड़ाई सिर्फ पत्ते-पुड़िया से है, तो वो लड़ाई वैसे भी अधूरी ही रहेगी, क्योंकि जिस खालीपन से भागने के लिए वो चाहिए होती है, वो अभी भी वहीं बैठा है, सिर्फ नाम बदल देगा अगली बार किसी और चीज़ का। अगली बार हाथ बढ़े, उससे ठीक पहले वाला पल पकड़ने लायक है, वहां क्या भागा जा रहा है उस वक्त, सिर्फ यह देखना शुरू कर दीजिए।