
✍🏻 पोस्ट 9 | 1 सितंबर '26 💭 विषय — मनोविज्ञान ──────── 😶 “नहीं” कहना था… फिर भी मुँह से “हाँ” निकल गया। कोई आपसे मदद माँगता है हाँ। कोई अपना काम आप पर डाल देता है हाँ। आप पहले से व्यस्त हैं फिर भी हाँ। मन बिल्कुल नहीं है फिर भी बोल देते हैं, “ठीक है, कर दूँगा।” और बाद में अकेले में सोचते हैं “मैं हर बार मना क्यों नहीं कर पाता?” 🧠 इसके पीछे एक कारण हो सकती है-दूसरों को खुश रखने की प्रवृत्ति। इसमें व्यक्ति दूसरों की स्वीकृति…










































