
नमस्ते जी मेरी सोच ये रही कि झगड़ा नहीं कहा सुनी नहीं हो, हर बात में सिर्फ हाँ ओर ये हाँ कहते कहते सच में जो देखा पत्थरो से गिरी हुयी दबी हुयी, यही मेरी भी हालत है, अब तो डर भी बेहद बैठ गया है हर पल डर, बहुत डर, समझ नहीं आ रहा कैसे ना कहना सीखूंगा कैसे अपनी बाते कहना सीखूंगा जरा सा ना कहते ही, गुस्सा क्लेश, बहुत डर बैठ गया है,
















