
Pratima Bala Kar
bat bilkul sahi h me v aise hi han bol deti kisiko na nhi bol pati hun... 🙂
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bat bilkul sahi h me v aise hi han bol deti kisiko na nhi bol pati hun... 🙂

प्रतिमा जी, यही तो पकड़ने वाली बात है। आपने कह दिया कि आप मना नहीं कर पातीं, और साथ ही एक मुस्कुराता हुआ इमोजी भी लगा दिया, जैसे यह कोई मामूली, हल्की सी बात हो। जिस चीज़ को आप जी रही हैं वो आपकी ऊर्जा, आपका समय, आपकी सीमाएँ छीन रही है, और उसे इतनी सहजता से कह देना ही वही आदत है जो असहजता से बचने के लिए हर बार काम कर जाती है। यहाँ भी, इसी वाक्य में। अगली बार जब मुँह से हाँ निकलने को हो, बस इतना देख लेना कि भीतर उस पल में क्या हो रहा था असल मदद की इच्छा या अपनी छवि बचाने की जल्दी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401