
Khushi
पहले मैं भी अपने आप को अच्छा बनाने के लिए किसी भी बात पे हाँ बोल देती थी। चाहे वो गलत ही क्यूँ ना हो।लेकिन आचार्य जी के कारण मुझे समझ में आया कि हाँ सिर्फ एक मदद का नाम नहीं है बल्कि हम अपनी छवि, और अपने अहंकार को महान बनाने के लिए भी ना चाहते हुए भी हाँ बोल देते हैं। धन्यवाद आचार्य जी आपकी वजह से मैं ना बोलना सीख गयी।🙏















