
✍🏻 पोस्ट 17 | 22 अक्टूबर ’26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ───────────── ⚖️ समाज की तय भूमिका छोड़कर ललिता ने कौन-सी राह चुनी? ✍️ महज़ 18 वर्ष की उम्र में अय्यालासोमायाजुला ललिता विधवा हो गईं। गोद में चार महीने की बेटी थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे अपना भविष्य तय नहीं होने दिया। 📜 1919 में मद्रास में जन्मी ललिता ने पति की मृत्यु के बाद पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। उनके पिता, इंजीनियरिंग के “प्रोफेसर पप्पू सुब्बा राव* ने उनका साथ दिया। 🏛️ 1940 में उन्होंने गिंडी स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। शुरुआत में वे कॉलेज की अकेली महिला विद्यार्थी थीं। बाद में लीला जॉर्ज और पी. के. थ्रेसिया जैसी छात्राएँ भी वहाँ आईं। 👩👧 बेटी की देखभाल के लिए उन्हें परिवार की मदद लेनी पड़ी। पढ़ाई के दौरान बेटी से दूर रहना और सप्ताहांत में उससे मिलने जाना उनके संघर्ष का हिस्सा था। 🎓 1943 में पढ़ाई पूरी करने और जमालपुर रेलवे वर्कशॉप में प्रशिक्षण लेने के बाद वे भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनीं। ⚙️ उन्होंने सेंट्रल स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन और एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज़ में काम किया। बिजली के पारेषण उपकरणों, सबस्टेशन और जनरेटर से जुड़े कार्यों में योगदान दिया। भाखड़ा-नांगल बाँध परियोजना के विद्युत उपकरणों से जुड़े काम में भी उनकी भूमिका रही। 🌍 1964 में उन्होंने न्यूयॉर्क में महिला इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के "प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन” में भाग लिया। वे इसमें शामिल होने वाली भारत की एकमात्र महिला इंजीनियर थीं। 1953 में उन्हें लंदन की इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की एसोसिएट सदस्यता मिली और 1966 में पूर्ण सदस्यता। 🪞 ललिता के सामने पति की मृत्यु, बच्ची की जिम्मेदारी और पुरुष-प्रधान पेशे की चुनौतियाँ थीं। परिवार का सहयोग मिला, लेकिन उन्होंने अपने लिए उपलब्ध अवसर को पहचाना और आगे बढ़ीं। 🌿 हम भी जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपनी संभावनाएँ सीमित मान लेते हैं। लेकिन क्या कठिन रास्ता देखकर रुक जाना ही एकमात्र विकल्प है? 💬 क्या हम अपनी परिस्थितियों के भीतर रास्ते खोजते हैं या उन्हें अपनी सीमाएँ बना लेते हैं? 🔗 स्रोत: https://en.wikipedia.org/wiki/Ayyalasomayajula_Lalitha https://alltogether.swe.org/2017/05/first-indian-woman-engineer/

















































