
🌿 हम भी जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपनी संभावनाएँ सीमित मान लेते हैं। लेकिन क्या कठिन रास्ता देखकर रुक जाना ही एकमात्र विकल्प है? जी मैने अपनी संभावनाएँ सीमित मान ली थी। कठिन रास्ता देखकर रुक गया था कई सालों तक। अब गति मिल गई है अपनी दिशा में। 💬 क्या हम अपनी परिस्थितियों के भीतर रास्ते खोजते हैं या उन्हें अपनी सीमाएँ बना लेते हैं? जी बिल्कुल हर बार रास्ता खोज लिया था, रचनात्मक तो बहुत है, लेकिन सीमाएं मान ली थी तो कुछ गति कर नहीं पाया। फिलहाल मैं कोचिंग की शुरुआत करना चाह रहा हूं, आज पहला कदम लिया जगह देखकर जो 10 किलोमीटर दूर थी जहां सच में बच्चों को जरूरत थी, रास्ता स्पष्ट दिख रहा है की बच्चों की मदद करना है फॉर्मेट बनाना है वर्कशीट देना है हर कदम पर बच्चे कम आश्रित होते जाएं। यह पूरी क्षमता से काम करने की सोच रहा हूं तो लग रहा है जो काम हो सकते हैं उन्हें भी क्यों ना शुरू किया जाए।


















