
हम दूसरे रास्ते खोजते हैं लेकिन फिर आस-पास का माहौल देखकर बदलने के बजाय और स्थिर हो जाते हैं और हमारा चुनाव खुद से नहीं बल्कि पुरानी मान्यताओं से उठता है और आलस ही हमारा चुनाव बन जाता है और अच्छा भी लगता है क्योंकि हमने कभी अच्छी किताबें पढ़ी हैं नहीं,दर्शन और साहित्य से हमारा दूर-दूर तक कोई लेना-देना रहता है नहीं!



















