
KALPNA TRIVEDI
परिस्थिति को स्वीकारा है और यही करती आई हूं। रास्ता बनाया जा सकता है, बल है उसका अहसास भी आचार्य जी को सुनने से हुआ।
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परिस्थिति को स्वीकारा है और यही करती आई हूं। रास्ता बनाया जा सकता है, बल है उसका अहसास भी आचार्य जी को सुनने से हुआ।
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