
समय या तो बोध में रुकता है या मूर्छा में || आचार्य प्रशांत (2013)
आचार्य प्रशांत

झूठ का गहरा अस्वीकार ही सत्य का स्वीकार है || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
आचार्य प्रशांत

चतुर व्यापारी बाँटता ही जाता है,और बाँटने हेतु पाता है || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
आचार्य प्रशांत

छोटी बातों का कारण पूछो, जो भी बड़ा है वो अकारण है || आचार्य प्रशांत (2015)
आचार्य प्रशांत

राम तक कैसे पहुँचोगे || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
आचार्य प्रशांत