बदलाव से ही डरता है ये निरंतर बदलता मन || आचार्य प्रशांत (2015)
आचार्य प्रशांत
क्यों ज़रुरी है कि संसार का काम चलता रहे? || आचार्य प्रशांत (2015)
कभी रंग कभी धूप कभी धूमिल मैदान है,बदलते मौसमों में भी आसमान तो आसमान है || आचार्य प्रशांत (2015)
Is the river really flowing? || Acharya Prashant (2016)
Acharya Prashant
Meditation: The meaning of 'The observer is the observed' ||Acharya Prashant, on Krishnamurti (2016)
How to surrender? || Acharya Prashant (2016)
Spirituality is the intimacy of the immediate, not the blaze of the beyond || Acharya Prashant(2016)
Love, take me to the Heart! || Acharya Prashant, on Saint Kabir (2016)
You cannot reject the world while holding on to yourself ||Acharya Prashant,on Krishnamurti (2016)
मन जब आत्मा में दृढ नहीं होता तब वो अपनी ही बनाई दुनिया में भटकता है || आचार्य प्रशांत (2015)
यदि उसे नहीं चाहता तुम्हारा प्रेमी, तो तुम्हें कैसे चाहेगा? || आचार्य प्रशांत (2015)
Living in facts versus living in thoughts || Acharya Prashant (2016)
न कैद की कसक, न मुक्ति की ठसक || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
अप्प दीपो भव, अहम् ब्रह्मास्मि इत्यादि क्या तुम्हारे लिये हैं? || आचार्य प्रशांत (2013)
विद्रोह के लिए सामर्थ्य की प्रतीक्षा मत करो, विद्रोह से ही सामर्थ्य आता है || आचार्य प्रशांत (2013)
ख्याल को तथ्य मत समझ लेना || आचार्य प्रशांत (2013)
मन के बहकाव का क्या करें? || आचार्य प्रशांत (2013)
ग्रन्थों के साथ सत्संग हो सकता है, तर्क या बहस नहीं || आचार्य प्रशांत (2015)
माँ-बाप तुम्हारी ही तरह आम हैं, उनसे विशिष्टता की उम्मीद अन्याय है || आचार्य प्रशांत (2013)
अनकहे को सुना तो अज्ञेय को जाना || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2015)
असत्य कुछ नहीं, सब आंशिक सत्य है || आचार्य प्रशांत (2013)
मुसीबतों को रोते हो और मदद को क्यों ठुकराते हो? || आचार्य प्रशांत (2013)
शरीर की नहीं, मन की मृत्यु से डरते हो तुम || आचार्य प्रशांत (2013)
कल्पना है शहद की धार,असली प्रेम खड्ग का वार || आचार्य प्रशांत (2013)
बँधा मन बँधा जीवन, बँधा व्यवहार बँधे रिश्ते और संसार || आचार्य प्रशांत (2013)
गुरु तुम्हें वो याद दिलाता है जो तुम जानते ही हो || आचार्य प्रशांत (2013)
संसार श्रम, सत्य विश्राम || आचार्य प्रशांत (2013)
India and Tolerance || Acharya Prashant (2016)
धर्म को नशा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत (2015)
ताकत मत माँगो, देखो कि क्या तुम कमज़ोर हो || आचार्य प्रशांत (2016)