अनकहे को सुना तो अज्ञेय को जाना || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2015)
आचार्य प्रशांत
योग्य और अयोग्य कर्म माने क्या? || आचार्य प्रशांत (2013)
मंदिर- जहाँ का शब्द मौन में ले जाये || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
भ्रांत कौन, और किसके लिए? || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2014)
आध्यात्मिक प्रतीक सत्य की ओर इशारा भर हैं || आचार्य प्रशांत (2013)
ध्यान में कर्म ही नहीं, कर्ता बदलता है || आचार्य प्रशांत (2018)
समझ और समर्पण || आचार्य प्रशांत, श्री जिद्दू कृष्णमूर्ति पर (2018)
मृत्यु का भय, और जीवहत्या || आचार्य प्रशांत (2018)
अध्यात्म और क्रिकेट || आचार्य प्रशांत (2018)
क्रांति है अपना साक्षात्कार, महाक्रांति अपना सहज स्वीकार || आचार्य प्रशांत (2015)
अँधेरा क्यों लुभाता है? || आचार्य प्रशांत, कठ उपनिषद् पर (2016)
मनुष्य वृत्तियों की भूमि पर परिस्थितियों का फैलाव है || आचार्य प्रशांत (2015)
अमूल्य से निकटता ही मूल्यहीन का त्याग है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2014)
अनुकम्पा, निर्णय और उचित कर्म || आचार्य प्रशांत (2018)
एक भय परम तक भी ले जाता है || आचार्य प्रशांत, कठ उपनिषद् पर (2017)
मन के मूड़े देखि करि, ता संग लीजै औट || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
इस शरीर की वास्तविकता || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
दाएँ हाथ से दो तो बाएँ को पता ना चले || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2013)
कभी रंग कभी धूप कभी धूमिल मैदान है,बदलते मौसमों में भी आसमान तो आसमान है || आचार्य प्रशांत (2015)
कर्तव्य और धर्म जितने अलग हैं, धर्म और प्रेम उतने ही एक || आचार्य प्रशांत (2015)
जो मुक्त है वही बंध सकता है || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2013)
सभ्यता किस लिए है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
गुरु का काम क्या है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
संवेदनशीलता ही वास्तविक सभ्यता है || आचार्य प्रशांत (2014)
व्यक्ति इकट्ठा क्यों करता है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
गुरु के प्रति धन्यवाद कम क्यों हो जाता है? || आचार्य प्रशांत (2017)
समाज द्वारा संस्कारित मन निजता से अनछुआ || आचार्य प्रशांत (2013)
महत्वपूर्ण है महत्वपूर्ण को याद रखना || आचार्य प्रशांत (2015)
न समर्थन, न विरोध || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
हम तुम्हारे समीप ही, मन जाए कहीं भी || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)