सारे सूखेपन को बहा ले जाता है प्रेम || आचार्य प्रशांत, कबीर पर (2014)
आचार्य प्रशांत
सेक्स और मौत में क्या संबंध है? || आचार्य प्रशांत, खलील जिब्रान पर (2014)
सच की अनुकम्पा से ही सच की प्यास जगती है || आचार्य प्रशांत (2014)
अपूर्णता का भाव है प्रेम की शुरुआत || आचार्य प्रशांत (2013)
जहाँ नहीं आग वहाँ जलन और ज्वाला,शीतल हो गया राख हो जाने वाला || आचार्य प्रशांत, संत रहीम पर (2014)
कैसे बताएँ हमें हुआ क्या है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
मनुष्य वही जो मनुष्यता की सीमाओं के पार जाए || आचार्य प्रशांत (2014)
प्रेम है मात्र अपने परित्याग में || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
गुरु से मन हुआ दूर, बुद्धि पर माया भरपूर || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Acharya Prashant
समझे जाने की इच्छा कहीं सम्मान पाने की इच्छा तो नहीं? || आचार्य प्रशांत (2015)
कर्तव्य और धर्म जितने अलग हैं, धर्म और प्रेम उतने ही एक || आचार्य प्रशांत (2015)
प्रेम बाँटना ही प्रेम पाना है || आचार्य प्रशांत (2015)
A life free of incompleteness and inferiority || Acharya Prashant, with youth (2014)
प्रतिफल की अपेक्षा ही संबंधों का रोग || आचार्य प्रशांत (2013)
If a leader needs followers, he will never let them be free || Acharya Prashant, with youth (2014)
काम चुनने का आधार क्या है? || आचार्य प्रशांत (2015)
सच्चा प्रेमी कौन? || आचार्य प्रशांत, संत रहीम पर (2014)
A relation born out of loneliness will cause suffering to all || Acharya Prashant, with youth (2015)
प्रेम - आत्मा की पुकार || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
सभ्यता किस लिए है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
मैं लड़कियों से बात क्यों नहीं कर पाता? || आचार्य प्रशांत (2015)
उचित कर्म कौन सा है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
समर्पण का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत (2015)
रिश्ते प्रेम के सस्ते विकल्प तो नहीं || आचार्य प्रशांत (2013)
अस्तित्व का बेशर्त नृत्य || आचार्य प्रशांत (2013)
प्रेम प्रथम या ध्यान? || आचार्य प्रशांत (2013)