
सम्बन्ध” किताब ने मेरे लिए रिश्तों को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। पहले मैं सम्बन्धों को सिर्फ भावनाओं, अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों के रूप में देखता था, लेकिन इस किताब ने समझाया कि सच्चे सम्बन्ध की जड़ हमारी अपनी समझ में होती है। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि हम अक्सर अपने खालीपन को भरने के लिए रिश्ते बनाते हैं, और यही कारण है कि उनमें टकराव और दुख पैदा होता है। मुझे खास तौर पर...

पहले मेरे सारे संबंध सिर्फ नाम, कामना, डर, लालच और सुरक्षा के दायरे में ही कैद थे जिससे भी रिश्ता होता उसे बस कामना, भोग की दृष्टि से देखती लेकिन जबसे ये बुक पढ़ी है ,संबंधों में मधुरता, प्रेम,आने लगा हैं,अब दूसरों से संबंध भोग का नहीं बल्कि उसे सही, उच्चतम ज्ञान तक लाने के लिए बनाती हूँ 😊

"Yesterday, I received this book to gift to the soon-to-be-married couple next door. I'm truly happy for them as they prepare to begin their beautiful journey together; I decided to gift "Sambandh book" to them. This book offers not just insights into relationships, but a deeper understanding of the self through the mirror of companionship. This book serves as a gentle guide, revealing how true re...

इस किताब को पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि किस से कैसा और किस स्तर का संबंध होना चाहिए। हम सब चारों और संबंधों से घिरे होते हैं। अगर हमारे संबंध ही अच्छे नहीं होंगे तो कैसे जीवन अच्छा चलेगा। संबंधो के बारे में हमारे दिमाग में बहुत सारे beliefs होते हैं जो कि समाज द्वारा दिए जाते हैं। पर उनकी असली सच्चाई क्या है वो आपको ये किताब पढ़ के पता चलेगी।

संबंध तो हम बनाते हैं किंतु किससे और कितना यह जानना जरूरी है बिना यह जाने जो भी संबंध बनाएंगे वह दुख का कारण ही होगा इसलिए यह जानते रहना जरूरी है कि मेरा समय ऊर्जा कहां पर निवेशित हो रहा है। इसका तीसरा चैप्टर मस्त लगा, वरना औपचारिकता में ही उलझा रहता। ये किताब मैने कुछ लोगो को उपहार स्वरूप भी दिया, किसको कितना फायदा हुआ, ये नहीं कह सकता।

उसी से रिश्ता बनाना जो या तो तुम्हें संसार का सार दिखाती हो या तुम्हारा तुमसे परिचय करता हो। ऐसा दर्पण हो जिसमें तुम्हारा शक्ल साफ नजर आती हो और किसी से रिश्ता मत बना लेना। अजीब जिंदगी जीती थी पहले,सोचती थी जीवन में जितने ज्यादा लोग रहेंगे उतना ही जीवन सफल होगा।ये अहंकार भी न क्या क्या खेल खेलता है।