
और क्या है जीवन?

सम्बन्ध” किताब ने मेरे लिए रिश्तों को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। पहले मैं सम्बन्धों को सिर्फ भावनाओं, अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों के रूप में देखता था, लेकिन इस किताब ने समझाया कि सच्चे सम्बन्ध की जड़ हमारी अपनी समझ में होती है। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि हम अक्सर अपने खालीपन को भरने के लिए रिश्ते बनाते हैं, और यही कारण है कि उनमें टकराव और दुख पैदा होता है। मुझे खास तौर पर...

पहले मेरे सारे संबंध सिर्फ नाम, कामना, डर, लालच और सुरक्षा के दायरे में ही कैद थे जिससे भी रिश्ता होता उसे बस कामना, भोग की दृष्टि से देखती लेकिन जबसे ये बुक पढ़ी है ,संबंधों में मधुरता, प्रेम,आने लगा हैं,अब दूसरों से संबंध भोग का नहीं बल्कि उसे सही, उच्चतम ज्ञान तक लाने के लिए बनाती हूँ 😊