
संबंध अच्छे बस दो ही तरह के होते है - ऐसे को पकड़ो जो तुम्हें बता दे कि तुम पूरे हो आधे नहीं हो [ जान लगती है ऐसों की संगति के लिए ], या हम जानते है , कि पूरे है किसी के बिना भी, तो जीतने घूम रहे है अपने को आधा , ढाई समझते हुए इन्हे जनवाऊँगा कि तुम पूरे हो पहले ही, तुम्हें मेरी जरूरत ही नहीं | तुम भी पूरे हम भी पूरे | तो रिश्ता किसलिए है? , जब कोई आधा है ही नहीं , कोई वजह ही नहीं , ऐसे ही को...