
संबंध तो हम बनाते हैं किंतु किससे और कितना यह जानना जरूरी है बिना यह जाने जो भी संबंध बनाएंगे वह दुख का कारण ही होगा इसलिए यह जानते रहना जरूरी है कि मेरा समय ऊर्जा कहां पर निवेशित हो रहा है। इसका तीसरा चैप्टर मस्त लगा, वरना औपचारिकता में ही उलझा रहता। ये किताब मैने कुछ लोगो को उपहार स्वरूप भी दिया, किसको कितना फायदा हुआ, ये नहीं कह सकता।