
इस किताब को पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि किस से कैसा और किस स्तर का संबंध होना चाहिए। हम सब चारों और संबंधों से घिरे होते हैं। अगर हमारे संबंध ही अच्छे नहीं होंगे तो कैसे जीवन अच्छा चलेगा। संबंधो के बारे में हमारे दिमाग में बहुत सारे beliefs होते हैं जो कि समाज द्वारा दिए जाते हैं। पर उनकी असली सच्चाई क्या है वो आपको ये किताब पढ़ के पता चलेगी।

ये बुक मैने भी के रखी थी लेकिन मिल ही नहीं रही है पढ़ी भी नहीं मैने । खो गई 🥹