


I drew exact book page for my Dauaghter 12 to 15 years ago though back then only I understood it's ture mining since she was so young. Now that she is 20,I want to gift her Birthday carefully chosen books. She was finally understand why her mom asked her to draw that page a_drawing even won her first place! 🥰

ये बुक मेरे लिए आंखे खोल देने वाली रही है। इसके माध्यम से ही मैं ये जान पाई कि क्या प्रेम है और क्या नहीं। आचार्य जी ने बड़े ही सहज तरीके से उनमें उन सभी मुद्दों के जवाब दिए हैं जो युवाओं को परेशान करते हैं। वास्तविक प्रेम क्या है मैं ये जान पाई। और क्या प्रेम नहीं है ये भी समझ पाई ✍️🪔 धन्यवाद

"प्रेम सीखना पड़ता हैं", ये किताब हर किसी को पढ़ना चाहिए , चाहे वो किसी भी उम्र का हो , बच्चे, बड़े, बूढ़े, लड़का, लड़की, सभी को इस किताब को पढ़ना चाहिए बिना प्रेम को जाने आप जो कुछ भी कर रहे, वो बस ऐसे ही है , हमें लगता हैं, हम कुछ कर रहे हैं, पर असलियत में हमें कुछ भी पता नहीं है, ये बिल्कुल ऐसा है, कि अंधेरे में तीर मार रहे हैं, तो कई बार सामने वाले लगता हैं, और कई बार वही तीर लौट के हमको ही ...
Ye book samjhati hai ki jise hum aksar prem samajhte hain, vo zyadatar attachment, fear, ya emotional dependency hota hai. Acharya Prashant ne simple but deep tareeke se bataya hai ki sachcha prem self-awareness, understanding aur inner growth se aata hai. Is book ne relationships, ego aur emotional patterns ko practical nazariye se dekhna sikhaya. Jo log apni personal life me clarity, emotional ...

“प्रेम सीखना पड़ता है” एक ऐसी किताब है जो प्रेम के बारे में हमारी आम धारणाओं को चुनौती देती है। इसे पढ़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि जिसे हम अक्सर प्रेम मान लेते हैं, वह कई बार केवल आकर्षण, आदत या निर्भरता होता है। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि सच्चा प्रेम एक समझ है, जो भीतर की जागरूकता और स्पष्टता से पैदा होता है। यह केवल भावना नहीं, बल्कि एक गहरी परिपक्वता है। मुझे खास तौर पर यह बात बह...

पुस्तक से मैने जाना कि– प्रेम/मोहब्बत/दीवानगी/इश्क की जो छवि हमने अपने मस्तिष्क में बना रखी है, जिसमें केवल एक नायक और नायिका पात्र होते है.. ये केवल फिल्मों और सुव्यवस्था की अध्यारोपित छवि है। ये प्रेम का कोई वास्तविक रूप नहीं। सिनेमा और समाज जो दिखाता है वो मोह/ अन्तःस्त्रावी आकर्षण/तन्हाई है। लेकिन जो ऋषियों और बुद्धों ने बताया वो प्रेम है, उन्मुक्त उड़ान है, स्वतंत्रता की मुक्त केलि है।

इस पुस्तक ने मेरे अंदर चल रहे पुराने ढर्रों को तोड़ने में मदद की है। आचार्य जी ने इस पुस्तक के माध्यम से हमें सिखाया है कि प्रेम कोई इन्द्रियगत, मनगत, विचारगत वस्तु या भावना नहीं है। प्रेम तो मुक्ति के प्रति एक सहज, स्वत: स्फुरित आकर्षण है। एक ऐसा आकर्षण कि जो हमें पता भी नहीं लगने देता और हमें बहाकर ले जाता है। हम तो बहुत सुरक्षाप्रेमी जीव है। प्रेम का अर्थ तो उन सब सुरक्षाओं को, दायरों को, अपने...
The best book I ever read in life ,it was a recommendation of a special person and now I can understand her mindset and intention of telling this book name ,here I understand the real meaning of not just love but about life and hardware suni sunayi bate sach nehi hota hai

मुझे भी 10th class में तथाकथित प्यार हुआ था। पहली बार किसी को देखकर दिल मे कुछ-कुछ हुआ था । और जैसा कि मैंने पहले से ही सुन रखा था की जब प्यार होता है, तब दिल मे कुछ-कुछ होता है । इसलिए मैं भी इसे प्यार समझ बैठा था। और पता नहीं मन ही मन कितने सारे, उम्मिदे और सपने सजा लिए थे मैंने उससे, बिना एक बार भी बात किये। और बिना ये सोचे समझे, की सामने वाले को क्या क्या किमत चुकानी पड़ेगी, मेरी उम्मिदे पू...

Thank you so much Acharya ji 🙏❤️ मैं जिस कठिन परिस्थितियों में फंसा हुआ था उससे निकालने के लिये 🙏 सदा आपका आभारी रहूंगा। आपने हमें वास्तविक प्रेम से परिचय कराया , अन्यथा हम उस आकर्षण और मोह से भरे भावनाओं में फंसे रह जाते , शायद उससे निकल ही न पाते या अपन अहित कर बैठते। काश आप पहले मिले होते ! मैं एक विद्यार्थी हूं और इस पुस्तक से मैंने बहुत कुछ सीखा और आगे सभी को सिखाऊंगा। इस पुस्तक को निश्चित...

मेरी सारी गुलाबी - गुलाबी ख्याल प्रेम को लेकर आचार्य जी से जोड़ने के बाद दूर होने लग गए थे। प्रेम पुस्तक पढ़ने के बाद और पूरी तरह चले गायब हो गए। पहले बहुत लगता थी प्रेम ऐसा होता है - वैसा होता है। सिर्फ एक बार होता है, किसी एक से होता है। फिर पता चला कि बॉलीवुड ने हमें कितना कुछ गलत सिखाया। फिल्मों ने कितना कुछ गलत सिखाया है प्रेम को लेकर। ~ धन्यवाद🙏💕

साधारणतया प्रेम हमारे लिए एक सांसारिक आकर्षण या मोह की छवि के रूप में जाना जाता है । आचार्य जी ने इस किताब के माध्यम से प्रेम के सही अर्थों को उद्घाटित किया है प्रेम,आत्मा,आनंद,अद्वैत ,स्वभाव आदि एक ही कोटि के शब्द हैं जो यह बताते है कि प्रेम कोइ प्राकृतिक घटना नहीं होती है अपितु यह हमारे न होने के भाव से उद्घाटित होता है अपितु मोह एक सांसारिक वृत्ति होती है

हम जिसे प्रेम कहते हैं वह हम तक मात्र किस्से-कहानियों और फिल्मों के माध्यम से पहुँचा है। ये भी एक गलतफहमी है कि प्रेम नैसर्गिक होता है। प्रकृति में, जानवरों में जो प्रेम दिखता है वो प्राकृतिक सौहार्द हो सकता है, प्रेम नहीं। प्रेम तो सीखना पड़ता है। प्रेम वास्तव में है मन का निरंतर आकर्षण, सतत प्रवाह शांति की तरफ। प्रेम का वरदान या प्रेम की संभावना तो बस इंसान को ही मिली है। वो भी संभावना मात्र ह...
फिल्मों वाला प्यार, लड़का लड़की वाला प्यार। बस यही पता था कि जब कोई किसी को दिल से चाहे तो उसे प्यार कहते हैं, तब न दिल का पता था, न चाहत का। मैं भी सोचती थी कि मुझे भी बहुत प्यार है अपने कल्पनाओं के कृष्ण से, कहानियों वाले कृष्ण से। इस पुस्तक में मुझे असली प्रेम का मतलब समझाया कि निरंतर ऊंचाई की और बढ़ते जाना ही प्रेम है। प्रेम देह की बात नहीं है कि एक उम्र आई, रसायनों ने अपना काम करना शुरू कर द...
This book help me define what is love and what i have made it in my reality with different projections of this is love or that is love .For ex- I had a void and the moment a person from opposite sex talked or engaged in long conversation or i sensed there is a deep bond that could be built upon and i named that thing as love but in reality when i faced it the result was the harsh truth i.e sucking...

🙏 जा मारग साहब मिले प्रेम कहावे सोय ♥️ ये आचार्य जी की उन पुस्तकों में से है जिसका शीर्षक मात्र ही जैसे पर्याप्त है मन को ये बताने के लिए कि जो कुछ भी आज तक प्रेम के बारे में सुना है सब झूठा ही है। 🤘 इस पुस्तक को पढ़ने पर bollywood और समाज द्वारा बताई गई प्रेम की उपभोक्तावादी छवि पर जैसे आघात सा लगता है। 😉 कई बार जो लोग आचार्य जी का विरोध करते हुए प्रतीत होते हैं मुझे लगता है कि उनकी असली खु...