प्रेम सीखना पड़ता है | Prem Seekhna Padta Hai

प्रेम सीखना पड़ता है | Prem Seekhna Padta Hai

छवियों से परे
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Paperback Details
Hindi Language
148 Print Length
Description
हम जिसे प्रेम कहते हैं वह हम तक मात्र किस्से-कहानियों और फिल्मों के माध्यम से पहुँचा है। ये भी एक ग़लतफ़हमी है कि प्रेम नैसर्गिक होता है। प्रकृति में, जानवरों में जो प्रेम दिखता है वो प्राकृतिक सौहार्द हो सकता है, प्रेम नहीं।

प्रेम तो सीखना पड़ता है।

प्रेम वास्तव में है मन का निरंतर आकर्षण, सतत प्रवाह शांति की तरफ़। प्रेम का वरदान या प्रेम की संभावना तो बस इंसान को ही मिली है। वो भी संभावना मात्र है।

प्रेम मिलेगा किसी कृष्ण जैसे के पास।
Index
CH1
प्रेम सीखना पड़ता है
CH2
क्या प्रेम किसी से भी हो सकता है?
CH3
कौन है प्रेम के काबिल?
CH4
सच्चे प्रेम की पहचान
CH5
दूसरे की चिंता करते रहने को प्रेम नहीं कहते
CH6
प्रेम की भीख नहीं माँगते, न प्रेम दया में देते हैं
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