
मुझे भी 10th class में तथाकथित प्यार हुआ था। पहली बार किसी को देखकर दिल मे कुछ-कुछ हुआ था । और जैसा कि मैंने पहले से ही सुन रखा था की जब प्यार होता है, तब दिल मे कुछ-कुछ होता है । इसलिए मैं भी इसे प्यार समझ बैठा था। और पता नहीं मन ही मन कितने सारे, उम्मिदे और सपने सजा लिए थे मैंने उससे, बिना एक बार भी बात किये। और बिना ये सोचे समझे, की सामने वाले को क्या क्या किमत चुकानी पड़ेगी, मेरी उम्मिदे पू...