यह पुस्तक पढ़ने के बाद मुझे प्रेम का अस्ति अर्थ पताचला। आमतौर पर हम जिससे प्रेम समझते हैं वह प्रेम नहीं है प्रेम ऊंची आध्यात्मिक बात है। प्रेम आत्मज्ञान से ही उदित होती है।