
हम अपने ही पूर्वाग्रहों को,पसंद,सुंदरता,उसमे कुछ अलग बात है!, विचार मिलन आदि। चीजों को ही प्रेम समझ लेते है। जबकि असली प्रेम अलग ही होता है। प्रेम अपने आप हो नहीं जाता है। प्रेम सीखना पड़ता है। प्रेम मतलब दूसरे को आजादी देना,ऊंचाई देना होता है।

बहुत बढ़िया प्रयास रवि जी!😊 कृपया amazon/flipkart इत्यादि वेबसाइट पर भी अपने रिव्यू पोस्ट करना ना भूलें! वहां रिव्यू पोस्ट करना ज्यादा जरूरी और जिम्मेदारी भरा कार्य है! 😊👍🏻