
✍🏻 पोस्ट 19 | 16 अक्टूबर '26 💭 विषय ─ लोकधर्म ────────── 😨 महिलाएँ खुद कोड़े खाने की माँग क्यों करती हैं? 🌍 अफ्रीका के इथियोपिया देश की दक्षिणी ओमो घाटी में हमार (Hamar) समुदाय रहता है। यहाँ एक ऐसी परंपरा है, जिसमें महिलाएँ खुद आगे आकर कोड़े मारने की माँग करती हैं। 🐂 इस समुदाय में ‘उकुली बुला’ नाम की रस्म होती है। इसमें युवक को कतार में खड़े मवेशियों की पीठ पर चार बार दौड़कर पार जाना होता है। इसे पूरा करने के बाद वह वयस्क और विवाह के योग्य माना जाता है। 🥁 समारोह में युवक की बहनें और अन्य महिला रिश्तेदार नाचते-गाते हुए ‘माज़ा’ कहलाने वाले पुरुषों के पास जाती हैं। ये वे पुरुष हैं, जो पहले यह रस्म पूरी कर चुके हैं। 🩸 महिलाएँ उनसे अपनी पीठ पर कोड़े मारने को कहती हैं। चोट से खून निकल सकता है और स्थायी निशान पड़ जाते हैं। लेकिन इन निशानों को शर्म नहीं, बल्कि प्यार, साहस और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि महिला ने अपने भाई के लिए जो पीड़ा सही है, उसके बदले वह भविष्य में उससे मदद माँग सकती है। 📖 BBC के अनुसार, इस रस्म में भाग न लेने वाली महिलाओं को नीची नज़र से भी देखा जाता है। 🤔 लेकिन कोई इंसान अपनी पीड़ा को सम्मान क्यों मानने लगता है? ऐसा केवल इथियोपिया में नहीं होता। अलग-अलग समाजों में ऐसी परंपराएँ मिलती हैं, जिनमें लोग स्वीकृति और सम्मान पाने के लिए कष्ट सहते हैं। 💭 बचपन से जब किसी काम को गौरव बताया जाता है, तो हम उसे बिना जाँचे स्वीकार करने लगते हैं। परंपरा पहले ही तय कर देती है कि क्या महत्त्वपूर्ण है और क्या नहीं। फिर हम उसी को अपना निर्णय समझ बैठते हैं। यही लोकधर्म की समस्या है। हम पूछना छोड़ देते हैं कि जो समाज ने सिखाया है, वह हमारे लिए सही भी है या नहीं। किसी परंपरा का सदियों पुराना होना उसके सही होने का प्रमाण नहीं है। उसे अपनी समझ से जाँचना ज़रूरी है। ❓ दूसरों की परंपराओं पर सवाल उठाने वाले हम, अपनी कितनी मान्यताओं को बिना जाँचे ढो रहे हैं? स्रोत: https://doi.org/10.1080/14725843.2026.2677554 https://acharyaprashant.org/en/articles/question-all-traditions-1_12c56a5e6















































