
मैं गीता कम्यूनिटी से जुड़ने से पहले बहुत सारी मान्यताओं को बिना जाँचे ढो रही थी! जिसमें एक मान्यता तो ये है कि हम महिलाएँ करवाँ चौथ का व्रत करती हैं, इसके बावजूद कई महिलाओं के पति नहीं है! क्या उस महिला ने बेमन से( झूठे) व्रत किये थे ? नहीं , हम जानते हैं कि मरना , जीना इंसान के हाथ में नही है। जन्म देने वाली और मुक्ति दायिनी ये "महा माया" है! माँ प्रकृति है। मैने ये सवाल कई महिलाओं से किया , तो उनके पास एक ईमानदार या स्पष्ट जवाब नहीं है। वो कहती हैं कि ऐसा हमारे पुर्खे करते आये है! इसलिए हम भी कर रहे है। ये बात उनको भली भांति पता है कि उनके व्रत से उनके पति की उम्र का कोई लेना देना नहीं है!



















