
✍🏻 पोस्ट 12 | 26 सितंबर '26 💭 विषय — विश्व दर्शन ────────── 🌟 ‘The Little Prince’: उम्र बढ़ने के साथ हमारी धारणाएँ इतनी मजबूत क्यों हो जाती हैं? एक बच्चा एक चित्र बनाता है। 🎨 उस चित्र में एक अजगर ने एक हाथी को निगल रखा है। लेकिन बड़े लोग उसे देखते हैं और कहते हैं, “यह तो टोपी है।” 👒 बच्चा दूसरा चित्र बनाकर उन्हें समझाने की कोशिश करता है। फिर उसे सलाह मिलती है कि चित्र बनाने के बजाय भूगोल, इतिहास, गणित और व्याकरण पढ़ो। यहीं से The Little Prince एक सवाल खड़ा करता है: ❓ क्या बड़ा होना वास्तव में दुनिया को बेहतर समझना है? या फिर उम्र बढ़ने के साथ हम अपनी बनाई धारणाओं में फँसते जाते हैं? Little Prince की यात्रा में उसे कई ऐसे बड़े लोग मिलते हैं। 👑 राजा: • जिसके पास कोई प्रजा नहीं, फिर भी वह राजा होने की सत्ता में जीता है। 💰 व्यवसायी: जो तारों को अपना मानकर उनकी गिनती करता रहता है। 🍷 शराबी: जो पीने की वजह भूलने के लिए पीता है, और भूलने की बात भूलने के लिए फिर पीता है। इन लोगों की दुनिया उनकी अपनी धारणाओं से बनी हुई है। और यहीं कहानी हमारे जीवन से जुड़ जाती है। हम भी दुनिया को सीधे नहीं देखते। हम पहले से तय कर लेते हैं: “सफल इंसान ऐसा होता है।” “सम्मान ऐसा दिखता है।” “बड़ा आदमी वह है जिसके पास इतना पैसा, पद या पहचान हो।” फिर हम दुनिया को देखने से पहले ही उसके लिए एक ढाँचा बना लेते हैं। 🪞 धीरे-धीरे वही धारणा हमें वास्तविकता जैसी लगने लगती है। ❓ क्या मैं किसी चीज़ को सचमुच देख रहा हूँ, या केवल अपनी बनाई हुई धारणा को? ❓ क्या उम्र के साथ समझ बढ़ी है, या केवल धारणाएँ बढ़ी हैं? शायद The Little Prince का सवाल यही है: ❓ क्या उम्र बढ़ने के साथ हमारी समझ बढ़ती है, या हम अपनी धारणाओं में और पक्के होते जाते हैं? 📖 स्रोत: The Little Prince • Antoine de Saint-Exupéry https://en.wikipedia.org/wiki/The_Little_Prince

















































