
Sangita mote
1) हम संसार को वैसा नहीं देखते जैसा वो है, हम उसे अपनी कंडीशनिंग (conditioned mind) के चश्मे से देख रहे हैं। जिसे हम सत्य समझ रहे हैं, वह हमारे अपने मन का एक projection है।" 2)इंसान के जीवन में उम्र के साथ समझ नहीं बल्कि पुरानी स्मृतियों और ढर्रे बढते हैं, और उसी को बुद्धिमत्ता मान लेते हैं। इसी समझ के कारण अहंकार अधिक जटिल हो जाता है। 3) "द लिटिल प्रिंस"' का यह प्रश्न बिल्कुल सटीक है- उम्र बढ़ने भर से कोई बड़ा नहीं होता। बड़ा वो है जो अपने ही भीतर की कंडीशनिंग और अतीत के ढरों को तोड़ने की हिम्मत रखता हो। सच्चा ज्ञान धारणाओं को इकट्ठा करना नहीं, बल्कि धारणाओं से मुक्त होना है।


















