निर्मलता की गहरी अभिलाषा ही तुम्हें निर्मल करती है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
आचार्य प्रशांत
कुसंगति क्या? तुम्हारा असली स्वभाव क्या? || आचार्य प्रशांत (2015)
जब शरीर ध्यान में बाधा बने || आचार्य प्रशांत (2019)
एक ही तथ्य है और एक ही सत्य; दूसरे की कल्पना ही दुःख है || आचार्य प्रशांत (2015)
तो फिर वो बुल्ले के दुश्मन हो जाएंगे || आचार्य प्रशांत, संत बुल्लेशाह पर (2017)
दुनिया की मक्कारी हट सकती है क्या? || आचार्य प्रशांत (2019)
रोज़ अज़ल दा || आचार्य प्रशांत, संत बुल्लेशाह पर (2014)
अवतार का जीवन कैसा? || आचार्य प्रशांत (2018)
अपने करे संसार तो मिला नहीं, परमात्मा क्या मिलेगा || आचार्य प्रशांत (2014)
अहंकार और रवैया || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
शास्त्र यदि ज्ञान हैं,तो तुम्हारे काम न आएंगे || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2015)
भय और भविष्य || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
मदद करने में डर क्यों लगता है? || आचार्य प्रशांत (2018)
कौन किसी की सुनता है || आचार्य प्रशांत (2018)
मूल्य से निकटता ही मूल्यहीन का त्याग है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2014)
कैसे जानें कि सत्संग समझ में आया? || आचार्य प्रशांत (2017)
बोध साहित्य को धीमी गति से पढ़ने की समस्या || आचार्य प्रशांत (2013)
स्वधर्म वही जो स्वभाव की ओर ले जाए || आचार्य प्रशांत (2014)
मन तो उलझा है, दिल फिर भी सुलझा है || आचार्य प्रशांत (2016)
गुरु के स्तर का नहीं, अपने स्तर का प्रश्न पूछो || आचार्य प्रशांत (2019)
इच्छाएँ और तलाश || आचार्य प्रशांत (2016)
तुम आधे हो, तुम्हें पूरा होना है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019)
बच्चों के प्रति वास्तविक ज़िम्मेदारी || आचार्य प्रशांत (2018)
अभिभावकों का कहना मानें या नहीं? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
सुरति माने क्या? || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
जिज्ञासा और श्रद्धा साथ चलते हैं || आचार्य प्रशांत (2017)
अनकहे को सुना तो अज्ञेय को जाना || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2015)
मन ने जो पकड़ा सब अधूरा, मन कहाँ जान पाएगा पूरा || आचार्य प्रशांत (2015)
रोमांच आकर्षक क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)
अपूर्ण पूर्ण के रूप में भी अपनी अपूर्णताओं को ही चाहेगा || आचार्य प्रशांत (2015)