

I love the the way of Acharya ji in which he has explained the Geeta in a very simplest way. And the main essence is to know the three purush, prakriti and atma only by understanding these three we could understand the main moto of the vedanta. I will not only read this but also try to live with each chapter in every day and every moment and my every karma should be to understand the Truth.

गीता भाष्य – भाग 1” पढ़कर मुझे गीता को देखने का एक बिल्कुल नया दृष्टिकोण मिला। पहले मैं इसे केवल एक धार्मिक ग्रंथ समझता था, लेकिन इस किताब ने बताया कि गीता वास्तव में हमारे अपने जीवन के संघर्षों और निर्णयों से जुड़ी हुई है। किताब में अर्जुन और कृष्ण के संवाद को बहुत ही गहराई से समझाया गया है, और उसे आज के जीवन से जोड़ा गया है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि हम भी अपने जीवन में उसी तरह के द्वंद्व...

ये किताब मेरे छोटे छोटे समस्याओं के पूर्णरूपेण समाधान के रूप में लगी। ये किसी समस्या का छोटा और सतही इलाज नहीं है, बल्कि मूल समाधान के रूप में है ये किताब। गजब की किताब है, इसे जरूर पढ़ें, सुने और बाटें। असली संघर्ष सिखाने के साथ ये हम(अर्जुन) को कृष्ण(हमारी चेतना के उत्थान) का रास्ता बताती है। ये मुझे पसंद है बहुत।

पुस्तक बहुत ही अच्छी है। पेज क्वालिटी भी बहुत अच्छी है। अगर यह बुक प्रशांत अद्वैत संस्था के अलावा कोई और पब्लिशर पब्लिश करता तो कम से कम ₹600 की मिलती। वही संस्था हमें इतनी कम कीमत मे इस पुस्तक को उपलब्ध करा रही है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। 🏅वही पुस्तक के भीतर का ज्ञान बहुमूल्य है जो आपको और कहीं नहीं मिल सकता। 🙏धन्यवाद आचार्य जी धन्यवाद PAF टीम

मेरी सीख : कर्म के पीछे कोई कर्ता नहीं, बस गुण मात्र हैं (श्लोक 3.28) जो जान लेता है कि जो बहार और भीतर चल रहा है वो बस गुण मात्र है, और सात ही सात ज्ञानी में सरलता भी पाई जाती है , सरलता के सात सात आनंद भी होता,ये ज्ञानी के लक्षण है। अब दूसरी और अज्ञानी (अहंकार) जो बना बैठा है उसके हिसाब से कामनाएं ही उसकी सांसे है, जो बना बैठा है वही बने रहने के लिए एक झूठा संसार खड़ा कर लेता है, उसी में उलझ...

इस बुक में गीता का सही अर्थ बताया है। अर्जुन विषाद, वर्णसंकर, जाती व्यवस्था, पुनर्जन्म,आत्मा,अहंकार, प्रकृति,निष्काम कर्म ,अकर्म ,पाप, पुण्य निष्काम प्रेम इसके बारे में जो श्रीकृष्ण ने कहा वही इस गीता के ग्रंथ में विस्तार से आचार्यजी ने समझाया है। यह गीता का ग्रंथ सबको जरूर पढ़ना चाहिए।

हम सुबह नींद जगने से लेकर रात को सोने तक जिन विचारों से गुजरते हैं, और जैसा जीवन हम जीते हैं—उनसे जुड़े लगभग हर सवाल का उत्तर इस पुस्तक में मिलता है। आचार्य प्रशांत जी ने भगवद्गीता को इतनी सरलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया है कि यह हर व्यक्ति के रोज़मर्रा के जीवन में उपयोगी सिद्ध होती है। जैसे अर्जुन के प्रश्न थे, वैसे ही जीवन को लेकर हम सभी के मन में भी प्रश्न होते हैं। हर व्यक्ति आज अर्...
मैने आचार्य प्रशांत जी की दोनों बुक्स पढ़ी है भाष्य 1 और 2। गीता इतना सही और प्रैक्टिकल मीनिंग आज तक मुझे समझ में नहीं आया था।मैने दूसरी भी गीताएं पढ़ी है लेकिन इस गीता में मेरे सारे प्रश्नों के उत्तर दे दिए। अब कोई प्रश्न नहीं बचा। थैंक्यू आचार्य जी मुझे हिंदी के उच्चतम साहित्य तक लाने के लिए।

जीवन में बहुत प्रश्न थे, उलझने थी और ये प्रश्न, उलझन किस वजह हो रही हैं? ये सब विचार कहा से और क्यू आते हैं? मानव जीवन का उद्देश क्या हैं। धर्म – अधर्म क्या हैं? पाप –पुण्य क्या हैं? इन सभी और इनसे भी अलग बहुत कुछ प्रश्नों का उत्तर इस book में मिलते जाते हैं।

पहले मैं भगवद्गीता को एक धार्मिक (जादुई) ग्रंथ समझता था कि इसे बस पड़ना होता है और पुण्य मिलेगा। सिर्फ आचार्य जी की वजह से ही समझ पाया कि भगवद्गीता "आत्मज्ञान" की पुस्तक है और इसे बिना समझे तो जीवन जीना भी सम्भव नहीं हैं। मुझे नया जीवन मिला है भगवद्गीता से।

Iam a Gita student. Shri Krishn continuously had a dialogue with Arjuna who has foremost mastery in swordmanship and he also considers himself Krishn s Sakha.Due to Moh,mamta,fear and other tendencies, Arjun is Quitting Dharmyudh in battlefield of Kurukshetr.In 18 Ch of Bhagwadgita by apply all Gyan and tactics Krishn cuts false gyan of Arjuna and says ke "mujh me hi raman karo means break your ...

We were given some customs, traditions to follow and we grasped it like truth. We were bound by casteism, social mannerism and that was happening in the name of religion. In other words, we all are Arjun's in some sense and where there is Arjuna; Shri Krishna will be needed to show us the true religion i.e. "Swadharma". This epic helps us understand about ourselves and who really Krishna is.

🎧 📘 श्रीमदभगवत गीता भाष्य १ 📿 एक अनुभव जो किताबों से आगे है... आचार्य प्रशांत की सजीवआवाज़ में है 🎧 कई बार मैंने Acharya Prashant की किताबें अपने करीबी लोगों को भेंट की हैं — परिवार में, दोस्तों को, उन लोगों को जो जीवन की सच्चाई जानने को आतुर हैं। पर अब पहली बार देख रहा हूँ कि लोग न सिर्फ किताबें रखते हैं, बल्कि सुन भी रहे हैं — और वो भी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बीच। 🚗 गाड़ी चलाते हुए, 🍳...

हमारी हालत अर्जुन जैसी है, जैसे अर्जुन मोह, डर, पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं वैसे ही हम भी अपने जीवन में हर क्षेत्र में मोह, डर, मान्यताओं से बंधे हुए हैं, हमे अर्जुन की तरह युद्ध में डटे रहना है, जब श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता ज्ञान दे रहे थे तब वो डटे रहे, ऐसे ही हमे भी आचार्य जी से गीता ज्ञान लेते समय डटे रहना है, मुझे इस बुक को पढ़ने से बहुत स्पष्टता मिली है, गीता को जीवन में उतारने से जीवन बेहतर हुआ...