
इस बुक में गीता का सही अर्थ बताया है। अर्जुन विषाद, वर्णसंकर, जाती व्यवस्था, पुनर्जन्म,आत्मा,अहंकार, प्रकृति,निष्काम कर्म ,अकर्म ,पाप, पुण्य निष्काम प्रेम इसके बारे में जो श्रीकृष्ण ने कहा वही इस गीता के ग्रंथ में विस्तार से आचार्यजी ने समझाया है। यह गीता का ग्रंथ सबको जरूर पढ़ना चाहिए।