
मेरी सीख : कर्म के पीछे कोई कर्ता नहीं, बस गुण मात्र हैं (श्लोक 3.28) जो जान लेता है कि जो बहार और भीतर चल रहा है वो बस गुण मात्र है, और सात ही सात ज्ञानी में सरलता भी पाई जाती है , सरलता के सात सात आनंद भी होता,ये ज्ञानी के लक्षण है। अब दूसरी और अज्ञानी (अहंकार) जो बना बैठा है उसके हिसाब से कामनाएं ही उसकी सांसे है, जो बना बैठा है वही बने रहने के लिए एक झूठा संसार खड़ा कर लेता है, उसी में उलझ...