
Rekha
आचार्य जी, आपकी हर हार में हमारा अहंकार जीत जाता है, और यही हमारी सबसे बड़ी भूल है। आपका यह दर्द, आपकी यह करुणा और आपका यह प्रेम सच में अनोखा है। आप हम जैसे न जाने कितने सोए हुए लोगों को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। इसे पढ़कर मेरे भीतर कुछ टूटा भी है और कुछ जागने की कोशिश भी कर रहा है। हमें जगाने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार, आचार्य जी.....✍️❤️















