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ASHISH TIWARI
मेरी हर कोशिश होशपूर्वक जीने की है पर बेहोशी ज़्यादा हावी है मेरे कोशिश में फिर भी मैं हार नहीं मानूँगा कब तक ये चलेगा गुरु जी





























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1 commentमेरी हर कोशिश होशपूर्वक जीने की है पर बेहोशी ज़्यादा हावी है मेरे कोशिश में फिर भी मैं हार नहीं मानूँगा कब तक ये चलेगा गुरु जी

आशीष जी, गौर करिएगा, आपने खुद ही कह दिया कि बेहोशी हावी है और कोशिश जारी है, फिर भी सवाल पूछ रहे हैं कब तक चलेगा। जब तक शरीर है, तभी तक चलेगा, इसका कोई और जवाब नहीं है। जिस दिन लगे कि बेहोशी हार गई और मामला निपट गया, समझिएगा वहीं सबसे गहरी बेहोशी बैठी है। कोशिश का जारी रहना ही जीत है, उसका खत्म होना नहीं।