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Manoj Maurya
पहले मैं सोचता था कि ऐसा कोई रास्ता नहीं कि जीवन को सही तरीके से जिया जाए क्योंकि सुख और दुख दोनों ही दुःख को जन्म देते लेकिन जब देखा शिवाय चेतना को छोड़ भौतिकी का जितना भी बाहर दिखता है वो सब माया है यहां तक कि ये आकाश, ये अंधकार, ये मरने का डर सब एक इनफॉर्मेशन के माध्यम से चल रहा है...लेकिन देखने वाला तो इससे बिल्कुल अछूता है...धन्य हैं ऐसे गुरु जो चाहे तो आराम से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं पर एक जागा हुआ इंसान अपनी कोशिश की उस जिद्द तक लगा है…















