✍️ पोस्ट 4 | 12 अक्टूबर '26
💭 विषय — मानव उत्कृष्टता
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⚖️ क्या हम जी रहे हैं, या सिर्फ अपने डर की पहरेदारी कर रहे हैं?
📜 अक्टूबर 1942 में सिंध के सक्कर में ब्रिटिश सैन्य ट्रेन की पटरियाँ खोलने के आरोप में 19 वर्षीय छात्र हेमू कालाणी को गिरफ्तार किया गया।
अदालत ने सीधे फांसी की सज़ा सुना दी।
पिता ने रोते हुए अंग्रेजों से यहाँ तक कह दिया "मेरे मासूम बेटे को बख्श दो, उसकी जगह मुझे फांसी पर चढ़ा दो।" माँ ने गिड़गिड़ाते हुए दया…
सिर्फ अपने डर की पहरेदारी कर रहे हैं। कुछ भी करते है सब के सब अपने को बचाते बचते करते है।
ये नहीं जानते है इसलिए सब कुछ में अपना पुरा 100% नहीं दे पाता हूँ।
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Pallavi
Apne dar ki Pehredari kar rhe hai
Akanksha Mishra
हम बस अपने डर की पहरेदारी करते हैं।
MAHIPAL saini
hum dar pahredari kar rahe hai
Moni
Hum bss apna ahankar main jee raha hai
Sandhya Verma
कहीं ना कहीं हम अपने अहंकार को बचाने की कोशिश करते हैं
Priyanka Kumari
ham dar me hi jite hai dar ki pahredari karte hai Aacharya ji kahte hai fir bhi unke mutabik nahi ji pa rahe hai hamari aham hamko vaise jine nahi dete jaise Aacharya ji kahte hai apne aham se kaise nikle
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Poonam sahani
Ham ji Nahin rahe hain bus Apne Dar Ki pahredari kar rahe hain
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Manju
नहीं जी रहे है । जैसे आचार्य जी सीखा रहे हैं वैसे तो नहीं जी पा रही हुं जो डर है वहीं पेहेरेदारी कर बैठ है
Chanchal Kasaudhan
मैं अपने डर को बचाने के लिए अपने आप से समझौता कर लेती हूं।
Simmi singh
हम अपने अहंकार की पहरेदारी करने में लगे हैं।
Sonam
हम सच में जी नहीं रहे हैं क्योंकि इसको जीना नहीं कहते बस अपने डर की पहरेदारी कर रहे हैं एक ऐसा डर जो हमें ही खाये जा रहा है।
ritu singh
jo sach ke liye maut se nahi dara wo hi vastav main jeevit hai 🕊️🕊️
Shabnam Singh
हां पहले तो जी नहीं रहे थे,
अब जीने की शुरुआत की है
Ritu Singh
🙏🙏
Amisha khandey
हम सिर्फ और अपने अहंकार की पहरे दारी कर रहे है।
Anshu Rajput
🙏🙏
Mahesh Ramrao Jadhav
पहले खुदीराम बोस थे जिन्होंने ऐसा किया था। भगवद्गीता उनके भी हाथ में थी और फांसी पर लटक गए थे। और अब इनके बारे में पता चला हेमू कालाणी।
दोनों में एक चीज साझी है भगवद्गीता। उन्होंने भगवद्गीता से खुद को इतनी जल्दी जान लिया।
जबकि उस समय में सिखाने वाला भी कोई नहीं था। इतना सटीक निर्णय और साफ नियत की जब जान ही लिया है तो अब पीछे नहीं हटेंगे। और उमर भी 20 से कम ही थी। और हम 25 के पार जाकर भी अपनी जवानी जीकर भी अपने आप को बचाते फिर रहे है।
लेकिन आज आचार्य जी हमे भगवद्गीता को इतना साफ तरीके से समझा रहे है। हम फिर भी अपने आप को बचाने में क्यों लगे है❓
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Babita Shukla
hum bas ji rahe hai or dare huye hai sach jaante huy bhi bolnr me dar lagta hai apni jaan ka izzat ka swarth ka aksar hum apraad hote huye dekhte hai or bolne se sakuchate hai ya ye sochte hai hume isse kya
mere saath kai baar aisa hua hai mai kabhi bhi jab anyay ki khilaf bolti hu to mere aap paas ki janta ya mere saathi mitra mujhe piche khichne ki ya saath chodne ku bolte hai kahte hai jada jhasi ki rani na bano fir bhi mujhe lagta hai agar mujhe yaha bolne me bhi dar lag raha hai to mai kha bol paaungi or lad paungi isliye mai bolti hu or kai baar kisi karanvas chup bhi rah jaati hu.
Reeta Gautam
डर की पहरेदारी कर रहे हैं ।
RAHUL RINAYAT
मैं तो अपनी ही बात कर सकता हु, मै तो बहोत बार अगर अन्याय भी हो रहा है तो उसे नजर अंदाज कर लेता हु.
उपरवाले जैसा बोलते है वैसा ही मानलेता हु.
अपनी बात स्पष्ट रूप से बोलने मे भी डर लगता है.
फांसी तो छोड़ो boss के सामने भी अपनी बात रखने मे डर लगता है.
कभी एकदम उतावला हो जाता हु, तो कभी एकदम ही धीमा, boss के केबिन मे जाने के बाद दिमाग़ काम करना बंद कर देता है.
जो बोलना होता है वों बोल नहीं पाता. ऐसा बहोत बार हुआ है.
शायद इसीलिए शोषण भी होता है और मैं कुछ बोल भी नहीं पाता हु.
डर के कारण अभी कर्जे मे हु, emi भरना पड़ता है.
आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है.
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Archana
प्रश्न-- क्या हम अपनी झूठी इज्जत बचाने के लिए, स्वार्थ और आराम बचाने के लिए , अपनी ही सच्चाई से समझौता कर लेते है, क्या हम सचमुच जी रहे है या अपना डर, अज्ञान, अंधेरा बचा रहें है ?
उत्तर__
बिना आत्म अवलोकन किये इस सवाल का जबाब इसलिए नहीं दे सकती क्योंकि ये सवाल भीतर की तरफ मुड़ने को कहता है, स्पष्ट है और गहरा हैं ___ ज़ब तक उसे खुद अपने जीवन मे झाककर ना देखा हो, जब तक एक एक सवाल जीवन सामने लेकर ना खड़ा हो जाये और उसका जबाब मांगे और उस वक़्त हमने क्या किया, क्या सोचा, क्या जबाब दिया
उसी स्पष्टता से सही जबाब भी आयेगा और ईमानदारी से बदलाव भी..
हालांकि जरा भी ईमानदारी हो इंसान के भीतर तो उसे साधारणतया ये पता होता है की जीवन मे क्यों और क्या चल रहा है। बात सिर्फ अहंकार के भारीपन की होती है, जो जीतना ही हल्का और सरल होगा वो उतना ही आसानी से इसे साफ साफ देख लेगा और मनेगा भी और जिसका अहंकार जितना ही ठोस होगा वो उतना ही हवा हवाई बातें करेगा, बिना कुछ जाचे परखे..
Roma Niburani
अपने डर की पहरेदारी कर रहे हैं।
Prema devi
Apne dar ke pahredari
Vinit
🌱 हम सचमुच नहीं जी रहे , मैं खुद की कहु तो नहीं जी रहा । डर की पहरेदारी ही करता हु,जितना मेरे सामने मेरी कमजोरी आती है उसे तो तोड़ देता हु पर जब नए आयाम में आती है तब खुद का आत्म सरंक्षण करता हु , भूल जाता हु कि यह वो ही कमी है जो पहले थी बस रूप दूसरा लेकर आ गई है। अपने आराम ,स्वार्थ के लिए मैं खुद को ही दोखा देता हु,खुद को ही खड्डे में गिरता हु,बड़ा दुख होता है। पर निरंतर खुद को देखना होगा , अहंकार को मैंने मजबूत करा है 20 साल ,मुझे ही चकमा देकर भाग जाता है ,शायद मेरी मुक्ति की गति धीमे है या मुक्ति की और बढ़ना नहीं चाहता । पर कुछ हो जाए अब समझौता नहीं करूंगा ,यदि कर भी लिया तो देखूंगा ऐसा क्या था जो मुझे समझौता करने को मजबूर कर रहा था ,उसको पकडूंगा और उसे तोड़ के भीतर से बाहर फेंक दूंगा।
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ASHA CHHAPOLIA
जो सिर्फ खुद को बचाने के लिए जीता है, वह ज़िंदा रहकर भी लाश है🙏
SUSHANT KUMAR
हम रोज डर की पहरेदारी में लगे हुए हैं। अपने आप को खोकर अपना भविष्य बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। पर अंत में हासिल कुछ भी नहीं होता। आखिर हैं तो हम चुन्नू लाल।
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Kamini mishra
हम हर समय अपने ही जीवन को बचाते रहते हैं।
PUJA KUMARI
हम अपने डर को पहरेदारी कर रहे हैं
Garima
I have understood this only after listening to the sessions that what is my direction. It was always to protect my identity. Every action or decision invested to this only, beliefs and more beliefs. Now I see this so many times and then i question myself "for whome" the answer really changes the whole thought process. I get a bit struck many times but i think that too is alright instead of just taking any direction without knowing anything.
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✍️ पोस्ट 4 | 12 अक्टूबर '26 💭 विषय — मानव उत्कृष्टता ────────── ⚖️ क्या हम जी रहे हैं, या…