✍🏻 पोस्ट 6 | 4 सितंबर '26💭 विषय — लोकधर्म─────────
👰🏻♀️🤵🏻 शादी हुई नहीं कि अगला सवाल तैयार होता है“अच्छा, अब बच्चा कब कर रहे हो?”
👵🏻 रिश्तेदार पूछते हैं, पड़ोसी पूछते हैं, कभी-कभी अपने ही बहुत करीबी लोग पूछते हैं।
जैसे शादी के बाद जीवन का अगला पड़ाव पहले से तय हो।
पहले शादी।
फिर बच्चा।
फिर दूसरा बच्चा।
फिर बच्चों की पढ़ाई।
फिर उनकी शादी।
🔄 एक पूरा रास्ता समाज ने पहले ही बना रखा है।
और कई बार व्यक्ति बस उस रास्ते पर चलता जाता है…
हाँ, समाज में यह पहले से ही बनाया हुआ है।
कल रात ही शादी की बात आई तो मम्मी बोल रही थी कि पहले कोई अच्छी लड़की मिल जाय फिर दोनों बहन भाई की शादी एक साथ ही कर देंगे।
मेरा भाई जो अभी 22 साल का है और मैं 20 की, मैने कहा कि मुझे अभी शादी नहीं करनी है मुझे पहले खुद के पैरों पर खड़े होना है।
तो मम्मी ने कहा जॉब की तैयारी तो शादी के बाद भी हो सकती है।
मैंने कहा लेकिन मैं पहले खुद को समझना चाहती हूं जानना है मुझे खुद को, हम खुद को ही बिना जाने लोगों को क्या जान पाएंगे।
और यहां का जो शादी की परंपरा जिसमें लड़के लड़की को पहले परिवार वाले देखते हैं फिर उनकी कुंडली मिलाई जाती है फिर लड़के लड़की को आपस में 10-15 मिनिट मिलने दिया जाता है और पूछते है, लड़का पसंद है? लड़की पसंद आई?
अब अगर मना कर देते है तो पूरे घरवाले छाती पर चढ़ने को तैयार रहते है कि कितनी अच्छी लड़की है या कितना अच्छा लड़का है क्यों नहीं करनी शादी? और कारण उनको यह बताओ कि बाहर se देखने से क्या होगा हम उनके बारे में कुछ नहीं जानते, (क्योंकि उनके सामने चेतना की बात करना तो व्यर्थ है, अहंकार वो बात तो समझना ही नहीं चाहता है।)
तो कहते है शादी के बाद जानना ही है।
तो मैने अपने ही गांव का उदाहरण दिया जिसमें एक लड़की को उसके पति ने कुल्हाड़ी से काटकर मार दिया और फिर खुद ट्रेन के नीचे आकर मर गया।
to कहा कि तब क्या समझ लिया और अनेकों ऐसे उदाहरण है जिनमें शादी करने के 1 साल बाद ही पति पत्नी की आपस में नहीं बनती।
तो मैने मम्मी से पूछा कि आप जिस समाज का कहकर शादी करने को कह रही हो जब लड़की पर अत्याचार होता है तो कहां जाता है समाज?
उस समय कोई जवाब नहीं आया और वो अपने दूसरे काम करने के बहाने से बात टालकर चली गई।
जब तक मुझ पर प्रेशर नहीं बनाया जाता शादी का तब तक ठीक है समझाने की कोशिश भी कर रही हूं लेकिन जब प्रेशर बनाया जाएगा तो एक्शन जरूर लेंगे।
सत्य की उद्दण्ड औलाद ✍️
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Shivam
हाँ
Pallavi
ha hum sab samaj ke rules ko hi apni life mante hai or fir pareshn rhte
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Suneeta Devi
अधिकत्तर समाज (करीबी) अपेक्षाओं को पहले से ही बनाकर रख देता है।
खुद के निर्णय, मजबूत स्थिति पर निर्भर करते हैं।तभी सामाजिक कुछ धारणाओं से बच सकतें हैं।
Vimla Patel
जिन्हें यह बातें समझ आ गई है , उन्हें फोर्सफुली ये शादी , बच्चा करना पड़ता हैं , जिन्हें नहीं आई उन्होंने इस समाज और लोगो की धारणाओं और मान्यताओं को अपना बना लिया है कि उन्हें ऐसा लगता ही नहीं है कि ये उनकी खुद की मांग नहीं है , बल्कि समाज की है ।
सरोज सोनी
हमारे शादी को 24 साल हो गए पति की कामना जिन्दा हैं एक दिन मुझसे पूछा बेबी ट्यूब के बारे मे क्या राय है हमने कहा 8 9 साल से पैर में साटिका है इसके लिए पैसा कम है और बच्चे पैदा करने के लिए पैसा उधार ले सकते हैं हमने भी बोल दिया आपको बच्चा चाहिए अनाथालय से ले लो पर जिम्मेदारी हमारी कुछ नहीं जो कुछ करना होगा खुद करना
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Ishoo
Mere sath bhi aisa hi ho rha h mujhe bhi sadi ke liye force kiya ja rha h jis karan Mai bhut hi presan hu mai kuchh bhi Kah lu mere Mata pita mante hi nhi mujhe to sadi nam se dar lage lga h
Akanksha yadav
मेरे साथ भी यही हुआ था
Khushboo Upadhyay
हाँ, कहीं न कहीं हम यहीं कर रहे हैं।
लेकिन जो व्यक्ति ये बात बिना सोचे समझे अपना रहा है उस वक्त दोनों दोषी है क्योंकि जब तक कोई सच जाने बिना मानेगा नहीं तब तक को खुदके प्रति दोषी है और ये दोनों पक्षों पर लागू होता है।
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RISHI KUMAR
😅 ghtita soch
Mukesh
दंपति फैसला अपनी पसंद , जानकारी से सामाजिक दबाव के आधार पर नहीं।
kailash kumar
❓ कहीं ऐसा तो नहीं कि हम अपनी सामाजिक आदत को उनकी ज़िंदगी का नियम बना रहे हैं?
➡️ हमारे पास सामाजिक आदत के सिवा और कुछ तो होता नहीं, फिर उन्हें हम और क्या दे सकते हैं। उनसे और किस तल की बात कर सकते हैं।
Shobha rani
yeh ek samajik chakkr hai jo step by step chalta hi rehta hai bina ye jane ki hame chahiye kya
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Sonam
Ham samajik aadat ko Mankar unki jindagi ka niyam banaa dete Hain ki yah to tumhen karna hi hoga aisa hi hota aaya ki kab shadi or kab bacche,ye sawal to jaise hamari jindagi ka hissa ban gaya ho.
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Pooja Prajapati
meri upar bhi shadi ke liye presher bnaya ja rha or mai mna krti hu ki mujhe nhi karni h shadi or na bachcha paida Krna h to kahate agar shadi ho gi hoti to abhi so bachho ki ma hoti h aksar mujhe aisa sunana padta h
Braj mohan
इस पूरी प्रक्रिया में सहजता कहाँ है?
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Pooja patel
❓ कहीं ऐसा तो नहीं कि हम अपनी सामाजिक आदत को उनकी ज़िंदगी का नियम बना रहे हैं? मैने भी शादी के बाद सोचा था कि अभी बच्चा नहीं करना हे लेकिन हो गया ओर अब समझ आता हे कि हम उनको सामाजिक आदत को उनकी जिंदगी का नियम बना रहे हे लेकिन अब ऐसा नहीं होना चाहिए कोशिश करेंगे
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Nikita Tomar
और ऐसे सवाल पूछने वाले लोग आपसे इन सवालों तक ही सीमित रहते है, इनके हिसाब से हमारी जिंदगी मे चाहे कुछ भी चल रहा हो ,पर इनके बनाए नियमों पर चलना बहुत जरूरी है।
हमारी बाकी परेशानियों से इनको कोई मतलब नहीं होता।बस इनके फालतू के बनाए गए नियम आप आंख बंद करके मानते जाओ, फिर ये आपको कही नजर नहीं आएंगे।
Kamini mishra
और यह देखना कि कहीं “लोग क्या कहेंगे” हमारी ज़िंदगी के फैसले तो नहीं ले रहा।
Anuradha
Forget about "when are you having baby?". This question "when are you going to get married itself "? comes from ignorance.
Our marriage is born out of Ignorance then the children and this cycles just goes on from one generation to another.
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Archana
हाँ, अक्सर ऐसा ही होता है। हम जो खुद करते आए हैं, उसे ही सही और सामान्य मान लेते हैं और फिर दूसरों से भी वैसा ही जीवन जीने की उम्मीद करते हैं।
सामाजिक आदत को जीवन का नियम समझ लेना ही समस्या है।
हमें देखना चाहिए कि जो सब कर रहे हैं, क्या वह सच में सही है- या सिर्फ इसलिए चल रहा है क्योंकि सब उसे करते आ रहे हैं?
Shalini Kushwaha
ये बातें मुझे किसी से भी पूछना नहीं पसंद था और कोई पूछता है तो मुझे बहुत बुरा भी लगता था और अगर मुझसे इस तरह के सवाल पूछे भी तो मैं भी गुस्सा होकर पूछ लेती थीं कि तुम कब कर रही हो ये सब और शादी वाले लोग पूछते हैं तो मैं बोल देती थी आप लोगों को ये सब करके क्या मिला है लेकिन मेरे आस - पास के सभी लोगों के यहीं सवाल रहते हैं और जब से आचार्य जी को सुनने लगी हु तब से ये सवाल और भी गलत लगने लगे हैं
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Neha prajapati
हम ऐसा ही समाज में देखते हैं उनका फैसला कोई और लेता हैं l
Prem Kumar
हम सामाजिक आदत को अपनी जिंदगी का नियम बना देते हैं
Deepak Singh
🙏🙏
Anjali Kumari
कहीं मेरी “चिंता” के पीछे यह अहंकार तो नहीं कि दूसरों की ज़िंदगी भी मेरी इच्छा से चले?
क्या मुझे उनकी ज़िंदगी की चिंता है, या बस अपना अधिकार छिनना बर्दाश्त नहीं?
SAUMYA KUMAR CHANDRAKAR
अक्सर हमारा फैसला हमारा नही होता है यह समाज या किसी और के दबाव में लिया गया फैसला होता है ।यह सब आत्मज्ञान के आभाव में होता है ।
Priyanshi Tw
एक नया जीवन देना सच में दो लोगों के बीच का बड़ा ही समझदारी से लिया हुआ फैसला होना चाहिए।
Kavita
ये फैसला समाज और हमारा नहीं बल्कि दंपति का ही होना चाहिए किसी को भी ये हक नहीं है।
Shiv Shankar Sharma
मैंने आज ये सीख उनको भेजी है जो बच्चे ना होने से परेशान है। तीन चार दंपत्ति है मेरी नज़र में, शायद कुछ बदले।
✍🏻 पोस्ट 6 | 4 सितंबर '26 💭 विषय — लोकधर्म ───────── 👰🏻♀️🤵🏻 शादी हुई नहीं कि अगला सवाल…