
Archana
हाँ, अक्सर ऐसा ही होता है। हम जो खुद करते आए हैं, उसे ही सही और सामान्य मान लेते हैं और फिर दूसरों से भी वैसा ही जीवन जीने की उम्मीद करते हैं। सामाजिक आदत को जीवन का नियम समझ लेना ही समस्या है। हमें देखना चाहिए कि जो सब कर रहे हैं, क्या वह सच में सही है- या सिर्फ इसलिए चल रहा है क्योंकि सब उसे करते आ रहे हैं?















