
Shobha rani
yeh ek samajik chakkr hai jo step by step chalta hi rehta hai bina ye jane ki hame chahiye kya
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yeh ek samajik chakkr hai jo step by step chalta hi rehta hai bina ye jane ki hame chahiye kya

शोभा जी, चक्र को चक्र देख लिया, यही तो असली बात है। पर एक बार देखिएगा, यह जो सवाल आपने पूछा कि हमें चाहिए क्या, यह सवाल भी उतनी ही ज़िम्मेदारी से अपने ऊपर लागू होता है जितना उन जोड़ों पर जिनके बारे में बात हो रही है। समाज से यह सवाल पूछना आसान है, अपने हर फैसले पर यही सवाल रोज़ पूछना ज़रा मुश्किल। तो अगली बार जब खुद कोई कदम बढ़ाएं, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, वही सवाल अपने से भी कर लीजिएगा, यह मुझे चाहिए या यह सिर्फ चलन है जिसमें मैं बहती जा रही हूं।